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राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 80

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीये पुष्प देख रहे है आप? ये वही पुष्प है जिसका जीवन इस डाली पर आरम्भ हुआ। पहले कलिका बन कर...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 81

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी हम सबके जीवन में कभी ना कभी पत्थरों का योग होता ही है। ये संसार हम पर कभी ना कभी पत्थर...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 82

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी मीठा पानी सबको भाता है, परन्तु खारा पानी किसी को नहीं भाता। अब सोचने वाली बात ये है कि “मोती” समुन्द्र...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 83

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी हम सब समय की महत्ता को पहचानते है। समय ही हमें बनाता है, समय ही हमें नष्ट कर देता है। कभी...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 84

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीकहते है सबकी सीमा होती है कठिनाइयों की, पीड़ा की, संकट की, अंधकार की भी। यदि किसी की सीमा नहीं होती...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 85

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी बहती नदियां कितनी सुन्दर होती है, पावन होती है, जहां से जाती है वहां एक नया जीवन प्रदान करती है। धरा...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 86

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीकभी-कभी हम अपने माता-पिता से कितने क्रोधित रहते है। सोचते है कि उनका ध्यान हमारी ओर है ही नहीं, सोचते है...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 87

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी बबूल का पेड़ कितना विशाल होता है, पीपल का पेड़ भी विशाल होता है। किन्तु क्या आपने कभी सोचा है क्यों...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -90

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी कभी सोचा है जब माता संतान को जन्म देती है तो क्या होता है? नौ माह का गर्भ, प्रसव की तीव्र...

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -91

राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीअग्नि क्या करती है? जलाती है फिर चाहे वो लकड़ी हो, कोयला हो, वस्त्र हो जो भी आप अग्नि में डालोगे...

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