ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध शिव आरती है। इस आरती में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनके दिव्य गुणों और शिव-तत्व की महिमा का भक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है।
इस आरती का लोकप्रिय आरंभ “ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा” से होता है। भक्त इसे भगवान शिव की आराधना और भक्ति के भाव से गाते हैं।
इस लेख में आपको ॐ जय शिव ओंकारा आरती के हिंदी लिरिक्स, English transliteration, Gujarati पाठ, आरती का अर्थ, धार्मिक महत्व, पाठ का समय और संबंधित शिव स्तोत्रों की जानकारी मिलेगी।
भगवान शिव की अन्य प्रसिद्ध स्तुतियों में शिव चालीसा और शिव पंचाक्षर स्तोत्र भी शामिल हैं।
Shiv Aॐ जय शिव ओंकारा आरती की जानकारी:
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| आरती का नाम | ॐ जय शिव ओंकारा |
| लोकप्रिय नाम | शिव आरती |
| समर्पित | भगवान शिव |
| भाषा | हिंदी |
| प्रकार | आरती / भक्तिपूर्ण स्तुति |
| प्रमुख भाव | भगवान शिव की स्तुति और आराधना |
| प्रचलित पाठ | पारंपरिक |
Table of Contents
ॐ जय शिव ओंकारा आरती क्या है?
ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव की प्रसिद्ध आरती है। इसमें शिवजी के विभिन्न स्वरूपों, उनके दिव्य चिह्नों और शिव की महिमा का वर्णन किया गया है।
आरती का प्रसिद्ध आरंभ “ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा” से होता है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव, शिव के विभिन्न रूपों तथा उनके दिव्य स्वरूप का स्मरण किया जाता है।
शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा लिरिक्स
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचानन राजे
कोरस : स्वामी पंचानन राजे
हंसासन गरूड़ासन
कोरस : हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज ते सोहे
कोरस : स्वामी दसभुज ते सोहे
तीनों रूप निरखता
कोरस : तीनों रूप निरखता
त्रिभुवन मन मोहे
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी
कोरस : स्वामी मुण्डमाला धारी
चन्दन मृगमद चंदा
कोरस : चन्दन मृगमद चंदा
भोले शुभ कारी
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे
कोरस : स्वामी बाघाम्बर अंगे
ब्रह्मादिक सनकादिक
कोरस : ब्रह्मादिक सनकादिक
भूतादिक संगे
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
कर मध्ये च’कमण्ड चक्र त्रिशूलधरता
कोरस : स्वामी चक्र त्रिशूलधरता
जग कर्ता जग हरता
कोरस : जग कर्ता जग हरता
जगपालन करता
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका
कोरस : स्वामी जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्ये
कोरस : प्रणवाक्षर के मध्ये
ये तीनों एका
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ जन गावे
कोरस : स्वामी जो कोइ जन गावे
कहत शिवानन्द स्वामी
कोरस : कहत शिवानन्द स्वामी
मनवान्छित फल पावे
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा
कोरस : ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा आरती का अर्थ
इस आरती में भगवान शिव के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और उनके गुणों का स्मरण किया गया है। आरती भगवान शिव को ब्रह्मांड के सृजन, पालन और संहार से जुड़े दिव्य स्वरूप के रूप में प्रणाम करती है।
आरती में शिवजी के साथ ब्रह्मा और विष्णु का उल्लेख, शिव के विभिन्न रूप, उनके आभूषण, त्रिशूल, कमंडल और अन्य धार्मिक प्रतीकों का वर्णन मिलता है।
अंतिम पंक्तियों में आरती गाने वाले भक्त के लिए “मनवांछित फल पावे” की प्रार्थना व्यक्त की गई है।
शिव आरती का धार्मिक महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में आरती पूजा के समापन या किसी महत्वपूर्ण चरण में दीप या प्रकाश अर्पित करने की भक्तिपूर्ण विधि है। भगवान शिव की आरती करते समय भक्त श्रद्धा और समर्पण के साथ शिवजी का स्मरण करते हैं।
ॐ जय शिव ओंकारा का पाठ भगवान शिव की भक्ति और स्तुति के भाव से किया जाता है।
शिव मंत्रों और स्तोत्रों के लिए महामृत्युंजय मंत्र और नमामि शमीशान पढ़ें।
शिव आरती कब करनी चाहिए?
- सोमवार की शिव पूजा
- प्रदोष व्रत
- महाशिवरात्रि
- श्रावण मास
- दैनिक शिव पूजा
शिव आरती कैसे करें?
- पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- भगवान शिव का स्मरण करें।
- दीपक जलाएं।
- अपनी परंपरा के अनुसार शिव पूजा करें।
- ॐ जय शिव ओंकारा आरती श्रद्धापूर्वक गाएं।
- अंत में शिवजी को प्रणाम करें।
ૐ જય શિવ ઓંકારા આરતી | Shiv Aarti Gujarati
જય શિવ ઓંકારા, ભજ જય શિવઓંકારા
બ્રહ્મા વિષ્ણુ સદાશિવ અર્ધાગી ધારા
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
અકાનન ચતુરાનન, પંચાનન રાજે, શિવ પંચાનન
હંસાનન ગરૂડાસન વૃષવાહન સાજે
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
દો ભુજ ચાર ચતુર્ભુજ, દસ ભુજ અતિ સોહે, શિવ દસ ભુજ
તીનો રૂપ નિરખતાં ત્રિભુવન જન મોહે
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
અક્ષમાલા વનમાલા રુણ્ડમાલા ધારી, શિવ રુણ્ડમાલા
ચંદન મૃગમદ સોહે ભાલે શુભ કારી, ॐ જય શિવઓંકારા
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
શ્વેતાંબર પીતામ્બર, વાધામ્બર અંગે, શિવ વાઘામ્બર
સનકાદિક બ્રહ્માદિક ભુતાદિક સંગે, ॐ જય શિવઓંકારા
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
લક્ષ્મીવર ગાયત્રી, પાર્વતી સંગે, શિવ પાર્વતી
અર્ધાંગી અરુ ત્રિભંગી સિર સોહત ગંગે, ॐ જય શિવઓંકારા
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
કરકે મધ્ય કમંડલ, ચક્ર ત્રિશૂલ ધર્તા, શિવ ચક્ર
જગકર્તા, જગભર્તા જગકા સંહર્તા, ॐ જય શિવઓંકારા
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
બ્રહ્મા વિષ્ણુ સદાશિવ જાનત અવિવેકા, શિવ જાનત
પ્રણવ અક્ષર મધ્યે યે તીનો એકા, ॐ જય શિવઓંકારા
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
ત્રિગુણ શીવજી કી આરતી, જો કોઇ ગાવે, શિવ જો કોઇ
કહત શિવાનન્દ સ્વામી ! મનવાંછિત ફલ પાવેં
કોરસ: ॐ જય શિવઓંકારા
ॐ जय शिव ओंकारा लिरिक्स
ॐ जय शिव ओंकारा FAQ
ॐ जय शिव ओंकारा क्या है?
ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण आरती है।
शिव आरती कब करनी चाहिए?
शिव आरती पूजा के दौरान या पूजा के समापन पर अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार की जा सकती है। सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में इसका पाठ विशेष रूप से लोकप्रिय है।
ॐ जय शिव ओंकारा आरती किस देवता को समर्पित है?
यह आरती भगवान शिव को समर्पित है।
शिव आरती के बाद क्या पढ़ सकते हैं?
भक्त अपनी परंपरा के अनुसार ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र या अन्य शिव स्तोत्रों का पाठ कर सकते हैं।
निष्कर्ष
ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव की भक्ति और स्तुति से जुड़ी प्रसिद्ध आरती है। इसमें शिवजी के विभिन्न स्वरूपों, दिव्य गुणों और महिमा का भक्तिपूर्ण वर्णन मिलता है।
इस पृष्ठ पर आपको शिव आरती के हिंदी लिरिक्स, आरती का अर्थ, धार्मिक महत्व, पाठ का समय, English transliteration और Gujarati पाठ उपलब्ध कराया गया है।
🙏 हर हर महादेव!




















