संकट मोचन हनुमानाष्टक भगवान हनुमान को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास से संबंधित मानी जाती है। इसमें भगवान हनुमान की वीरता, श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति और संकटों से रक्षा करने वाले स्वरूप का वर्णन किया गया है।
संकटमोचन हनुमान अष्टक गीत हनुमान चालीसा एल्बम से लिया हे । को नहीं जानत है जग में कपि गीत को हरिहरन ने गाया है और संगीत ललित सेन और चंदर ने दिया है। संकटमोचन हनुमान अष्टक भगवान हनुमान को समर्पित एक लोकप्रिय भक्ति भजन है
संकट मोचन हनुमानाष्टक की जानकारी:
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| पाठ का नाम | संकट मोचन हनुमानाष्टक |
| लोकप्रिय आरंभ | को नहीं जानत है जग में कपि |
| रचयिता | गोस्वामी तुलसीदास से संबंधित |
| गायक | हरिहरन |
| संगीत | ललित सेन, चंदर |
| एल्बम | श्री हनुमान चालीसा |
| गीत/पाठ | पारंपरिक |
| लेबल | टी-सीरीज़ |
| भाषा | हिंदी |
| प्रकार | हनुमान भक्ति स्तुति |
Table of Contents
संकट मोचन हनुमानाष्टक क्या है?
संकट मोचन हनुमानाष्टक भगवान हनुमान की स्तुति में रचित आठ पदों वाला भक्तिपूर्ण पाठ है। इसमें हनुमान जी की लीलाओं और श्रीराम के कार्यों में उनके योगदान का वर्णन मिलता है।
हनुमानाष्टक में बाल हनुमान द्वारा सूर्य को ग्रहण करना, सुग्रीव की सहायता, माता सीता की खोज, लंका में उनका पराक्रम, लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाना और राम-लक्ष्मण को अहिरावण से मुक्त कराने जैसी कथाओं का स्मरण किया गया है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक लिरिक्स हिंदी में – संकट मोचन हनुमानाष्टक
॥ हनुमानाष्टक ॥
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि श्राप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही शोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु-मुद्रिका शोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
रावन युद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो |
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
कोरस : संकटमोचन नाम तिहारो (२)
॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥
| Mangal Murti Maruti Nandan | मंगल मूर्ति मारुति नंदन |
| Jai Jai Jai Hanuman Gosai | जय जय जय हनुमान गोसाई |
| Aarti Kije Hanuman Lala Ki | आरती कीजै हनुमान लला की |
| Bajrang baan | श्री बजरंग बाण पाठ |
| Hanuman Chalisa | हनुमान चालीसा |
| Radhakrishna Hanuman Theme | जय हनुमान ज्ञान गुण सागर |
Sankatmochan Hanuman Ashtak Lyrics in English
नीचे हिंदी पाठ को English letters में लिखा गया है ताकि हिंदी न पढ़ पाने वाले पाठक भी इसका उच्चारण समझ सकें।
Baal Samai Ravi Bhakshi Liyo Tab,
Teenahu Loka Bhayo Andhiyaro ।
Taahi So Traas Bhayo Jag Ko,
Yah Sankat Kaahu So Jaat Na Taaro ।
Dewan Aani Kari Bintee Tab,
Chaadhi Diyo Ravi Kasht Niwaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Baali Ki Traas Kapees Basai Giri,
Jaat Mahaaprabhu Panth Nihaaro ।
Chownki Mahaa Muni Saap Diyo Tab,
Chahiy Kaun Bichaar Bichaaro ।
Kai Dwij Roop Liwaay Mahaa Prabhu,
So Tum Daas Ke Sok Niwaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Angad Ke Sang Lain Gaye Siya,
Khoj Kapees Yah Baain Uchaaro ।
Jeevat Na Bachihau Hum Son Ju,
Bina Sudhi Laay Ehaan Pagu Dhaaro ।
Hayri Thake Tatt Sindhu Sabaai Tab,
Laay Siya-Sudhi Praan Ubaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Raavan Traas Dayee Siya Ko Sab,
Raakshashi So Kahi Sok Nivaaro ।
Taahi Samay Hanuman Mahaprabhu,
Jaay Mahaa Rajneechar Maaro ।
Chaahat Seeya Asoka So Aagi Su,
Dai Prabhu Mudrika Soka Nivaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Baan Lagyo Ur Lakshiman Ke Tab,
Praan Taje Sut Raavan Maaro ।
Lai Griha Baidya Sushen Samet,
Tabai Giri Dron Su Beer Upaaro ।
Aani Sajeewan Hath Dayee Taba,
Lakshiman Ke Tum Praan Upaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Raavan Yudh Ajaan Kiyo Tab,
Naag Ki Phaas Sabhi Sir Daaro ।
Sri Raghunath Samet Sabai Dal,
Moh Bhayo Yah Sankat Bhaaro ।
Aani Khagesh Tabai Hanumaan Ju,
Bandhan Kaati Sutraas Nivaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Bandhu Samet Jabai Ahiraavan,
Lai Raghunath Pataal Sidhaaro ।
Devhi Puji Bhalee Vidhi So Bali,
Deu Sabai Mili Mantra Vichaaro ।
Jaay Sahaay Bhayo Tab Hi,
Ahiraavan Sainya Samet Sanhaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
Kaaj Kiye Barh Dewan Kei Tum,
Beer Mahaaprabhu Dekhi Bichaaro ।
Kaun So Sankat Mohin Gareeb Ko,
Jo Tumso Nahin Jaat Hai Taaro ।
Begi Haro Hanumaan Mahaprabhu,
Jo Kuch Sankat Hoya Hamaaro ।
Ko Nahin Jaanat Hai Jag Mein Kapi,
Chorus : Sankat Mochan Naam Tihaaro…(2)
॥ Doha ॥
Laal Deh Laalee Lase,
Aru Dhari Laal Langoor ।
Bajra Deh Daanavdalan,
Jai Jai Jai Kapi Soor ॥
શ્રી સંકટમોચન હનુમાન અષ્ટક – संकट मोचन हनुमानाष्टक लिरिक्स गुजराती में
શ્રી સંકટમોચન હનુમાનાષ્ટક સ્તુતિ
બાલ સમય રવિ ભક્ષ લિયો તબ, તીનહુઁ લોક ભયો અઁધિયારો ।
તાહિ સોં ત્રાસ ભયો જગ કો, યહ સંકટ કાહુ સોં જાત ન ટારો ॥
દેવન આનિ કરી બિનતી તબ, છાઁડિ દિયો રવિ કષ્ટ નિવારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૧ ॥
બાલિ કી ત્રાસ કપીસ બસૈ ગિરિ, જાત મહાપ્રભુ પંથ નિહારો ।
ચૌંકિ મહામુનિ શાપ દિયો તબ, ચાહિય કૌન બિચાર બિચારો ।।
કૈ દ્વિજરૂપ લિવાય મહાપ્રભુ, સો તુમ દાસ કે શોક નિવારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૨ ॥
અંગદ કે સંગ લેન ગયે સિય, ખોજ કપીસ યહ બૈંન ઉચારો ।
જીવત ના બચિહૌ હમ સોં જુ, બિના સુધિ લાએ ઈહાઁ પગુ ધારો ।।
હેરિ થકે તટ સિંધુ સબૈ તબ લાય, સિયા-સુધિ પ્રાન ઉબારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૩ ॥
રાવન ત્રાસ દઈ સિય કો સબ, રાક્ષસિ સોં કહિ શોક નિવારો ।
તાહિ સમય હનુમાન મહાપ્રભુ, જાય મહા રજનીચર મારો ।।
ચાહત સીય અશોક સોં આગિ સુ, દૈ પ્રભુમુદ્રિકા શોક નિવારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૪ ॥
બાન લાગ્યો ઉર લછિમન કે તબ,પ્રાન તજે સુત રાવન મારો ।
લૈ ગૃહ બૈદ્ય સુષેન સમેત, તબે ગિરિ દ્રોન સુ બીર ઉપારો ।।
આનિ સજીવન હાથ દઈ તબ, લછિમન કે તુમ પ્રાન ઉબારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૫ ॥
રાવન યુદ્ધ અજાન કિયો તબ, નાગ કિ ફાઁસ સબૈ સિર ડારો ।
શ્રીરઘુનાથ સમેત સબૈ દલ, મોહ ભયો યહ સંકટ ભારો ॥
આનિ ખગેસ તબૈ હનુમાન જુ, બંધન કાટિ સુત્રાસ નિવારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ।। ૬ ॥
બંધુ સમેત જબૈ અહિરાવન,લૈ રઘુનાથ પાતાલ સિધારો ।
દેબિહિં પૂજી ભલી બિધિ સોં બિલ, દેઉ સબે મિલી મંત્ર બિચારો ।।
જાય સહાય ભયો તબ હી, અહિરાવન સૈન્ય સમેત સઁહારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૭ ॥
કાજ કિયે બડ દેવન કે તુમ, બીર મહાપ્રભુ દેખી બિચારો ।
કૌન સો સંકટ મોર ગરીબ કો, જો તુમસોં નહિ જાત હૈ ટારો ।।
બેગિ હરો હનુમાન મહાપ્રભુ, જો કછુ સંકટ હોય હમારો ।
કો નહિ જાનત હૈ જગ મેં કપિ, સંકટમોચન નામ તિહારો ॥ ૮ ॥
(દોહા)લાલ દેહલાલી લસે, અરૂ ધરી લાલ લંગૂર ।
બજ્રદેહ દાનવ દલન, જય જય જય કપિ શૂર ॥
। શ્રી તુલસીદાસકૃત સંકટમોચન હનુમાનાષ્ટક સંપૂર્ણ ।
संकट मोचन हनुमानाष्टक का भाव और महत्व
इसके आठ पदों में हनुमान जी से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं का स्मरण किया गया है। इनमें सूर्य को फल समझकर ग्रहण करना, सुग्रीव की सहायता करना, माता सीता की खोज, लंका में पराक्रम, लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाना और श्रीराम-लक्ष्मण को अहिरावण से मुक्त कराना जैसे प्रसंग शामिल हैं
संकटमोचन का अर्थ क्या है?
संकटमोचन शब्द का सामान्य अर्थ है—संकट से मुक्ति दिलाने वाला या कठिनाई दूर करने वाला।
भगवान हनुमान को भक्त परंपरा में “संकटमोचन” कहा जाता है क्योंकि वे श्रीराम के कार्यों में आने वाली कठिन परिस्थितियों को दूर करने वाले वीर और सहायक स्वरूप में वर्णित हैं।
संकट मोचन हनुमानाष्टक भजन वीडियो
“को नहीं जानत है जग में कपि” से प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमानाष्टक का वीडियो नीचे देखें।
भक्त परंपरा में हनुमानाष्टक का पाठ भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा, साहस, भक्ति और संकटमोचक स्वरूप के स्मरण से जुड़ा माना जाता है।
संकटमोचन हनुमान अष्टक भगवान हनुमान को समर्पित एक भक्तिपूर्ण पाठ है, जो हिंदू धर्म में शक्ति, भक्ति और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में पूजनीय हैं। माना जाता है कि हनुमान अष्टक का पाठ या जप करने से भक्त को कई लाभ मिलते हैं। संकटमोचन हनुमान अष्टक से जुड़े कुछ संभावित लाभ इस प्रकार हैं:
संकट मोचन हनुमानाष्टक FAQ
संकट मोचन हनुमानाष्टक के रचयिता कौन हैं?
संकट मोचन हनुमानाष्टक की रचना गोस्वामी तुलसीदास से संबंधित मानी जाती है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक किस देवता को समर्पित है?
यह भगवान हनुमान को समर्पित भक्तिपूर्ण स्तुति है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक का पहला पद कौन सा है?
इसका पहला पद “बाल समय रवि भक्षी लियो तब…” से आरंभ होता है
“को नहीं जानत है जग में कपि” का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति में हनुमान जी की प्रसिद्धि और उनके संकटमोचक स्वरूप की स्तुति की गई है।
हनुमान जी को संकट मोचन क्यों कहते हैं?
“संकटमोचन” का सामान्य अर्थ है संकट से मुक्ति दिलाने वाला। भक्त परंपरा में भगवान हनुमान को उनके पराक्रम, साहस और श्रीराम के कार्यों में आने वाली कठिन परिस्थितियों को दूर करने वाले स्वरूप के कारण “संकटमोचन” कहा जाता है।
संकटमोचन हनुमानाष्टक में कितने पद हैं?
मुख्य हनुमानाष्टक में आठ पद हैं और इसके साथ अंत में एक दोहा भी दिया जाता है।
निष्कर्ष
संकट मोचन हनुमानाष्टक भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और संकटमोचक स्वरूप का स्मरण कराने वाली प्रसिद्ध स्तुति है। इसके आठ पदों में हनुमान जी की विभिन्न वीर लीलाओं और श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य सेवा का वर्णन मिलता है।
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🙏 जय श्रीराम।
🚩 जय बजरंगबली।
लेखक: ICanSpirit Editorial Team
Updated: August 2026





















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