शिशुपाल वध की कहानी | Shishupal Vadh Mahabharat story in hindi

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शिशुपाल वध की कहानी - Shishupal Vadh Mahabharat

दोस्तों क्या आप जानते हो शिशुपाल वध की कहानी ? और वह किस देश का राजा था ? महाभारत में शिशुपाल कौन था ? तो इस लेख को पूरा अंत तक जरुर पढ़ें. क्योंकि आज के इस लेख में हम आपको शकुनि Shishupal Vadh Mahabharat Story के बारेमे सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं.

शिशुपाल वासुदेवजी की बहन तथा छेदी के महाराज दमघोष का पुत्र था. जो कि भगवान श्रीकृष्ण की बुआ का पुत्र था  इस प्रकार वो भगवान श्रीकृष्ण का भाई था.

शिशुपाल जीवन परिचय

अन्य नाम:जय, श्रुत,शिशुपाल
पिता:दमघोष
माता:श्रुतशुभा
भाई:दासग्रीव, राम्या, बलि, कुशादिशा
शस्त्र:चंद्र-हास तलवार, धनुष-बाण और गदा
जन्म:चंदेरी, चेदि (आज का बुंदेलखंड)
सूत्र:पुराण
शैली:आध्यात्मिक कहानी

Shishupal vadh Mahabharat story Krishna Ramanand sagar – शिशुपाल वध

महाभारत काल में जब कुरु कुल में कौरवों और पांडवों के बीच महाराज पांडू के ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर को युवराज घोषित करने का निर्णय लिया गया, तो इस शुभ प्रसंग के लिए राजसूय यज्ञ आयोजित करने का निर्णय लिया गया. इस हेतु सभी संबंधियों, रिश्तेदारों सहित अनेक राजाओ एवम् अन्य प्रतिष्ठित महानुभावो को आमंत्रित किया गया

तब वासुदेव श्री कृष्ण को भी आमंत्रित किया गया क्योकिं महारानी कुंती उनकी बुआ थी तथा शिशुपाल भी इस यज्ञ में शामिल हुआ, क्योकिं वह कौरवो एवं पांड्वो का भी भाई था. इस समय एक बार फिर भगवान श्री कृष्ण और शिशुपाल का आमना – सामना हुआ.

शिशुपाल, भगवान श्री कृष्ण से क्रोधित था, जिसका कारण था -: भगवान श्री कृष्ण का राजकुमारी रुक्मणी के साथ विवाह करना.

YouTube Video : Shishupal Vadh

भगवान श्री कृष्ण ने राजकुमारी रुक्मणी से विवाह किया था. परन्तु राजकुमारी रुक्मणी का विवाह उनके भाई राजकुमार रुक्मी ने अपने परम मित्र शिशुपाल के साथ करना निश्चित किया था. विवाह के सारे आयोजन हो चुके थे,

परन्तु राजकुमारी रुक्मणी भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी और उन्ही से विवाह करना चाहती थी और राजकुमार रुक्मी ऐसा नहीं होने देना चाहते थे . तब भगवान श्री कृष्ण राजकुमारी रुक्मणी को महल से भगाकर ले गये और उनसे विवाह कर लिया. तब शिशुपाल ने इसे भगवान श्री कृष्ण द्वारा किया गया अपना अपमान समझा और भगवान श्री कृष्ण को अपना भाई न समझ कर शत्रु मान बैठा

शिशुपाल का वध (Shishupal vadh Mahabharat)

महाभारत काल में राजकुमार युधिष्ठिर के युवराज्याभिशेक के समय, युवराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण को सर्वप्रथम भेंट आदि प्रदान की और सम्मानित किया, तब शिशुपाल से भगवान श्री कृष्ण का सम्मान देखा न गया और क्रोध से भरा बैठा शिशुपाल बोल उठा कि“ एक मामूली ग्वाले को इतना सम्मान क्यों दिया जा रहा हैं जबकि यहाँ अन्य सम्मानीय जन उपस्थित हैं” और शिशुपाल ने भगवान श्री कृष्ण को अपमानित करना प्रारंभ कर दिया.

शिशुपाल भगवान श्री कृष्ण को अपशब्द कहे जा रहा था, उनका अपमान किये जा रहा था, परन्तु भगवान श्री कृष्ण उनकी बुआ एवं शिशुपाल की माता को दिए वचन के कारण बंधे थे, अतः वे अपमान सह रहे थे और जैसे ही शिशुपाल ने सौ अपशब्द पूर्ण किये और 101वां अपशब्द कहा, भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र का आव्हान किया और इससे शिशुपाल का वध कर दिया. इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया.

शिक्षा (शिशुपाल वध महाभारत ) Moral :

इस कथा में भगवान श्री कृष्ण की सहनशीलता, क्षमा करने की शक्ति और बड़ो की बात को आदरपूर्वक पूर्ण करने की शिक्षा मिलती हैं.

शिशुपाल वध पर आधारित अक्षर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • शिशुपाल कृष्ण का कौन था?

    श्रीकृष्ण की बुआ का बेटा था शिशुपाल जिसने छेदी के राजा दमघोष के यहां जन्म लिया था

  • शिशुपाल किसका अवतार है?

    भगवान विष्णु के द्वारपाल जय के तीसरे अवतार थे शिशुपाल

  • भगवान कृष्ण ने शिशुपाल को कैसे मारा?

    १०० अपशब्द के पश्चात भी न रुकने पर श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया

निष्कर्ष 

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