राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 16
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी
जब से मनुष्य जाति का अस्तित्व बना है
तभी से युद्ध भी अस्तित्व में आया।
युद्ध जो कभी धन का द्वन्द बन के...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 15
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी
संसार में सबसे बड़ी शक्ति क्या है?
अब आपमें से कुछ कहेंगे शस्त्र की कुछ कहेंगे शास्त्र की,
कोई कहेगा बुद्धि की तो...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 14
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीमनुष्य का स्वभाव है कमाना, संग्रह करना फिर चाहे वो धन हो, नाते हो, संबंध हो या हो प्रसन्नता, परन्तु क्या आपने कभी...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 13
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीभयभय सबको होता है चाहे वो पशु हो, पक्षी हो या मनुष्य।वास्तविकता में मनुष्य भय को अपने साथ लेके ही जन्म...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 12
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीप्रेम संसार का सबसे पवित्र बंधन है, पर सच पूछो तो ये बंधन से मुक्ति है, स्वतंत्रता है। नहीं समझे? में समझाता हूँ...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 11
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीप्रेम, प्रेम विधाता की सबसे सुन्दर कृति है, परन्तु हर कृति हो संभालना पड़ता है।अब इसी मूर्ति को देख लीजिये, जब कलाकार...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 10
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीजब भी प्रेम की बात आती है हम सबसे पहले मन में एक नायक और एक नायिका का चित्रण कर लेते है, क्यों...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 09
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीकिसी भी वस्तु को बाँध सकने के लिए किसी बंधन का, किसी रस्सी का होना आवश्यक है। परन्तु इस रस्सी को बाँध सकने...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 08
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीमेरे आस-पास ये वृक्ष, ये पौधे, ये पुष्प देख रहे है आप?है ना सुन्दर? क्योंकि आपने इन्हें देखा है। इसी प्रकार जब...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 07
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीये मटकी देख रहे है आप?इसमें जल रखा जाता है,जल जो शुद्ध रहता है, शीतल रहता है, जल जो प्यास बुझाता है।सोचिये, यदि इस...













