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रविवार, 4 नवंबर 2018

Vyarth Chinta Hai Jeevan Ki Lyrics - Mahabharat

Krishna Bhajan - Vyarth Chinta he Jivanki Lyrics in Hindi - Mahabharat

Vyarth Chinta Hai Jeevan Ki Lyrics - Mahabharat

व्यर्थ चिंता हे जीवन की 
व्यर्थ हे मृत्यु का भय 

आत्मा को न मार पाते 
शस्त्र अग्नि  या समय 

पंच भूतों की बनी 
ये देह केवल वस्त्र हे 

आत्मा का जो वास्तविक हे 
घर कहि अन्यत्र हे

हे परिवर्तन ही सत्य 
जूथ सबका साथ हे 

कुछ न खोना कुछ न पाना 
रिक्त रहते हाथ हे

ईश्वर स्वयं हे सृष्टि सारी 
कहा उसको खोजना 

जो भी होता शुभ ही होता 
सब उसीकी योजना 

कामना ये फल की छूटे 
वो ही सच्चा कर्म हे 

ईश्वर चरण में हो समर्पण 
वो ही केवल धर्म हे 

व्यर्थ चिंता हे जीवन की 
व्यर्थ हे मृत्यु का भय 

आत्मा को न मार पाते 
शस्त्र अग्नि  या समय 

Most Beautiful song of Lord Krishna

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