राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 74
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी अपने महल के सबसे ऊंचे शिखर पर खड़ा व्यक्ति उसे भी एक “भय” होता ही है। भय उस महल के नींव...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 76
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीजीवन में कुछ भी पाना हो तो “सोच” और “कर्म” बड़े आवश्यक होते है। किन्तु क्या केवल सोच से, क्या केवल...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 77
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीहम मनुष्य कितने ढीठ होते है, एक बार लक्ष्य पर दृष्टि साध ली तो उसे पाने के लिए जी-जान लगा देते...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 78
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी हम सब जीवन में स्वयं के लिए सर्वश्रेष्ठ ही सोचते है। सबसे अच्छी सुविधा पाना चाहते है, सबसे अधिक सम्मान पाना...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 79
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी कहते है जीवन में मेल-मिलाप अत्यंत आवश्यक है। संबंधों का आधार भी बनता है, व्यापार भी चलाता है। किन्तु सबसे अधिक...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 80
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीये पुष्प देख रहे है आप? ये वही पुष्प है जिसका जीवन इस डाली पर आरम्भ हुआ। पहले कलिका बन कर...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 81
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी हम सबके जीवन में कभी ना कभी पत्थरों का योग होता ही है। ये संसार हम पर कभी ना कभी पत्थर...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 82
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी मीठा पानी सबको भाता है, परन्तु खारा पानी किसी को नहीं भाता। अब सोचने वाली बात ये है कि “मोती” समुन्द्र...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 83
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी हम सब समय की महत्ता को पहचानते है। समय ही हमें बनाता है, समय ही हमें नष्ट कर देता है। कभी...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी – 84
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीकहते है सबकी सीमा होती है कठिनाइयों की, पीड़ा की, संकट की, अंधकार की भी। यदि किसी की सीमा नहीं होती...











