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मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

Mahakali Ant hi aarambh hai Dialogue | महाकाली

Mahakali Ant hi aarambh hai Dialogue

अंत ही आरंभ  हे

अ  से अंत अ से आरंभ

मोक्ष तू प्रकाश तू

मार्ग तू संसा रक्षक तू

अंत तू आरंभ तू

काली तू महाकाली तू

Mahakali Ant hi aarambh hai Dialogue



अत्याचार की ज्वाला में जब जब सृष्टि जली  हे
तब तब पार्वती से एक महाकाली जन्मी हे

दिया  उसने सृष्टि को अपनी
अपार शक्ति का प्रमाण
जिससे वे खुद थी अनजान

आनंद और आंशु की एक ही राशि हे गौरी
आंनद जब सीमा पार कर जाता हे
तो आँखों में आंशु आ ही जाते हे

नारी बाण  हे नारायण और हम प्रत्यंचा
प्रत्यंचा का पीछे हटना आवश्यक हे
उसी प्रकार नारी को अपने बल का भार हो
इसके लिए पुरुष का पीछे हटना आवश्यक हे

नारी अगर शंका त्याग दे तो स्वयं शंकर बन जाती हे
अंत ही आरंभ  हे

स्त्री पर जब भी कोई संकट आता हे
तो सदैव पुरुष के पास क्यों चली आती हे
अपनी रक्षा स्वयं क्यों नहीं करती ?

अपमान जब स्त्री का होता हे
तो प्रतिकार स्वयं क्यूँ नहीं लेती

अपना युद्ध स्वयं हे लड़ना होता हे पार्वती
क्यूंकि जो विजय दुसरो की सहायता से मिलें
उसे विजय नहीं दया केहते हे  

दीपक  सूरज का मार्गदर्शन

कैसे कर सकता हे पार्वती?
तुम शक्ति का महासागर हो
तुम्हारे भीतर छुपे तेज को
तुम्हे खुद ही ढूँढना होगा
फीर जिसे लक्ष्य पाना हो
उसे यात्रा स्वयं करनी पड़ती हे

कौन हु में ? क्या हे मेरा परिचय ?
तुम सब की रक्षक हो पार्वती
एक चेतना हो भक्तो के लिए आशा
और पापियों के लिए चेतावनी हो तुम
शक्ति हो जो काल से परे हे

महाकाल हु में और तुम महाकाली

शक्ति के बिना शिव शव हे
अबला शब्द में बल बहुत हे गौरी
तुम शिव की पत्नी शिव का आधा भाग हो

पति के रूप में महादेव का चयन किया हे गौरी तुमने
उत्तरदायित्व तो उठाना ही होंगा

कल का चयन ही आज का परिणाम बनके
सामने आता हे
चयन का अंत ही परिणाम का आरंभ  हे

अविश्वास का अंत ही
आत्मविश्वाश का आरंभ  हे



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