राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -97
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीइस संसार में सबसे बड़ा पाप क्या है? कोई कहेगा असत्य, कोई कहेगा छल तो कोई कहेगा लालच। नहीं, संसार में...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -98
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीइस हीरे को देख रहे है आप? लाखों, करोड़ों वर्षों तक धरती के गर्भ में रहने के पश्चात ये इतना कठोर...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -99
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीप्रकृति ने हर जीव में एक भाव भरा है ताकि वो निश्छल ना रहे, कुछ ना कुछ कर्म करता रहे और...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -100
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी जीवन को रथ कहा जाता है किन्तु क्यों? अब आप कहेंगे इसलिए क्योंकि जीवन भी रथ की ही भांति चलता रहता...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -101
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी बताइये श्रेष्ठ कौन, रेशम के धागे बनाने वाला या उन धागों को बुन कर वस्त्र बनाने वाला? निश्चित रूप से वस्त्र...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -103
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणकभी आपने किसी पंछी को देखा है? तीव्र वायु, भयंकर वर्षा, हिंसक जीव कई बार उनके घोसलों को नष्ट कर देते...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -106
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी“अग्नि” जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है ये अग्नि। ये अग्नि ही है जो ऊर्जा बन कर हमें जीवित रखती...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -107
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीये संसार बहुत ही बड़ा है और हम उसके सामने बहुत ही छोटे है। इस संसार में लाखों लोग ऐसे मिल...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -105
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीसमय बड़ा ही विचित्र अनुभव देता है। जब प्रतीक्षा कर रहे हो तो लम्बा हो जाता है, एक-एक क्षण एक-एक दिन...
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणी -108
राधाकृष्ण | कृष्ण वाणीये है एक कोमल सा धागा सोचता हूँ यदि मैं इससे वस्त्र बुन लूँ तो स्वयं के लिए कितनी सुन्दर...











