माँ शैलपुत्री आरती: शैलपुत्री माँ बैल असवार | Maa Shailputri Aarti

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माँ शैलपुत्री आरती शैलपुत्री माँ बैल असवार
नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की सम्पूर्ण आरती

माँ शैलपुत्री आरती (Maa Shailputri Aarti) नवरात्रि के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की आराधना में गाई जाती है। “शैल” का अर्थ पर्वत और “पुत्री” का अर्थ बेटी है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी को शैलपुत्री कहा जाता है।

माँ शैलपुत्री को वृषभ पर विराजमान, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल धारण किए हुए दर्शाया जाता है।

यहाँ पढ़ें माँ शैलपुत्री की सम्पूर्ण आरती “शैलपुत्री माँ बैल असवार”, साथ ही आरती का सरल अर्थ, मंत्र, प्रार्थना और नवरात्रि के प्रथम दिन उनकी पूजा का महत्व।


माँ शैलपुत्री की आरती | Maa Shailputri Aarti Lyrics

॥ आरती देवी शैलपुत्री जी की ॥

शैलपुत्री माँ बैल असवार।
करें देवता जय जयकार॥

शिव-शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने न जानी॥

पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सुमिरे सो सुख पावे॥

रिद्धि सिद्धि प्रदान करे तू।
दया करे धनवान करे तू॥

सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती जिसने तेरी उतारी॥

उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥

घी का सुन्दर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के॥

श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें।
प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥

जय गिरराज किशोरी अम्बे।
शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥

मनोकामना पूर्ण कर दो।
चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥

॥ जय माँ शैलपुत्री ॥


माँ शैलपुत्री आरती का सरल अर्थ

इस आरती में भक्त माँ शैलपुत्री के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए उन्हें भगवान शिव की प्रिय भवानी के रूप में प्रणाम करता है।

“शैलपुत्री माँ बैल असवार” में माँ के वृषभ वाहन का वर्णन है।

“पार्वती तू उमा कहलावे” में देवी के पार्वती और उमा स्वरूप का स्मरण किया गया है।

इसके बाद भक्त माँ से कृपा, सुख और मंगल की प्रार्थना करता है।

“घी का सुन्दर दीप जला के” और “श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें” जैसी पंक्तियाँ भक्त के पूजा-भाव को व्यक्त करती हैं।

अंत में भक्त माँ को गिरराज किशोरी कहकर प्रणाम करता है और जीवन में सुख, शांति तथा मंगल की कामना करता है।

इस आरती का मुख्य भाव श्रद्धा, शरणागति, देवी-भक्ति और माँ की कृपा की प्रार्थना है।


माँ शैलपुत्री कौन हैं?

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा की जाती है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार देवी सती ने अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। पर्वत को संस्कृत में “शैल” कहा जाता है, इसलिए देवी का नाम शैलपुत्री प्रसिद्ध हुआ।

माँ शैलपुत्री को पार्वती और हेमवती नामों से भी जाना जाता है।


माँ शैलपुत्री का स्वरूप

माँ शैलपुत्री को दो भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप में दर्शाया जाता है।

उनके:

दाहिने हाथ में त्रिशूल
और
बाएँ हाथ में कमल का पुष्प

सुशोभित रहता है।

माँ का वाहन वृषभ अर्थात बैल है। इसी कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।

उनका स्वरूप दृढ़ता, पवित्रता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।


नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि का प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना को समर्पित है।

यह नवदुर्गा उपासना की शुरुआत भी है।

भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार माँ की पूजा करते हैं। पूजा में माँ का ध्यान, मंत्र-जप, प्रार्थना, स्तुति और अंत में आरती की जा सकती है।

इस दिन भक्त माँ से जीवन में धैर्य, सद्बुद्धि, भक्ति और धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना कर सकते हैं।


माँ शैलपुत्री का मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

सरल अर्थ

माँ शैलपुत्री को नमस्कार है।

नवरात्रि के प्रथम दिन माँ के ध्यान और पूजन के समय इस सरल नाम-मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है।


माँ शैलपुत्री प्रार्थना

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

सरल भावार्थ

मैं मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण करने वाली, वृषभ पर विराजमान, त्रिशूल धारण करने वाली यशस्विनी माँ शैलपुत्री को प्रणाम करता हूँ।


माँ शैलपुत्री स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

सरल भावार्थ

जो देवी सभी प्राणियों में माँ शैलपुत्री के रूप में स्थित हैं, उन देवी को बार-बार नमस्कार है।


माँ शैलपुत्री की आरती कैसे करें?

माँ शैलपुत्री की पूजा अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार करें।

सामान्य भक्तिपूजन में:

  1. पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
  2. माँ शैलपुत्री का ध्यान करें।
  3. श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्वलित करें।
  4. ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥ मंत्र का स्मरण करें।
  5. माँ की प्रार्थना या स्तुति करें।
  6. माँ शैलपुत्री की आरती करें।
  7. अंत में माँ से अपनी भूलों के लिए क्षमा तथा भक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा की विशिष्ट विधि अपनी पारिवारिक परंपरा अथवा योग्य आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार की जा सकती है।


माँ शैलपुत्री की पूजा का आध्यात्मिक महत्व

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा की उपासना का प्रथम स्वरूप हैं।

पर्वत की पुत्री के रूप में उनका स्वरूप स्थिरता और दृढ़ता का सुंदर आध्यात्मिक प्रतीक माना जा सकता है।

नवरात्रि के पहले दिन उनकी आराधना के साथ भक्त नौ दिनों की देवी-उपासना आरम्भ करते हैं।

भक्त माँ से जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक मार्ग पर दृढ़ रहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।


माँ शैलपुत्री आरती कब करें?

माँ शैलपुत्री की आरती विशेष रूप से:

  • नवरात्रि के प्रथम दिन
  • माँ शैलपुत्री की पूजा के बाद
  • प्रातःकालीन देवी पूजा
  • संध्या पूजा
  • दुर्गा पूजा
  • माता की चौकी
  • दैनिक देवी उपासना

के समय श्रद्धापूर्वक की जा सकती है।


माँ शैलपुत्री आरती FAQ

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का कौन-सा स्वरूप हैं?

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं।

माँ शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के किस दिन होती है?

माँ शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है।

माँ शैलपुत्री की आरती कौन-सी है?

माँ शैलपुत्री की प्रचलित आरती इन पंक्तियों से शुरू होती है:
शैलपुत्री माँ बैल असवार।
करें देवता जय जयकार॥

माँ शैलपुत्री का मंत्र क्या है?

माँ शैलपुत्री का सरल मंत्र है: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

माँ शैलपुत्री का वाहन क्या है?

माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ अर्थात बैल है।

माँ शैलपुत्री के हाथों में क्या होता है?

माँ शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का पुष्प दर्शाया जाता है।

शैलपुत्री नाम का क्या अर्थ है?

“शैल” का अर्थ पर्वत और “पुत्री” का अर्थ बेटी है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी को शैलपुत्री कहा जाता है।

क्या माँ शैलपुत्री की आरती केवल नवरात्रि में कर सकते हैं?

नवरात्रि का पहला दिन उनकी विशेष आराधना से जुड़ा है। भक्त श्रद्धानुसार अन्य दिनों में भी माँ की आरती और स्मरण कर सकते हैं।


नवदुर्गा के 9 स्वरूप

नवरात्रि के नौ दिनों में नवदुर्गा के इन नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है:

  1. माँ शैलपुत्री
  2. माँ ब्रह्मचारिणी
  3. माँ चन्द्रघण्टा
  4. माँ कूष्माण्डा
  5. माँ स्कन्दमाता
  6. माँ कात्यायनी
  7. माँ कालरात्रि
  8. माँ महागौरी
  9. माँ सिद्धिदात्री

माँ शैलपुत्री की आरती के साथ उनके मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तोत्र और कवच भी पढ़ सकते हैं।


माँ शैलपुत्री से प्रार्थना

हे माँ शैलपुत्री!

हमारे जीवन में भक्ति, धैर्य और सद्बुद्धि बनाए रखें। कठिन परिस्थितियों में हमें दृढ़ रहने की शक्ति दें।

हमारे विचारों को पवित्र और कर्मों को धर्म के मार्ग पर चलने वाला बनाएँ।

आपके चरणों में हमारी श्रद्धा सदैव बनी रहे।

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

जय माँ शैलपुत्री 🙏


माँ शैलपुत्री से जुड़ी अन्य धार्मिक जानकारी

माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। माँ की आरती के साथ उनके मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तोत्र और कवच भी पढ़ें।

माँ शैलपुत्री मंत्र, प्रार्थना, स्तोत्र और कवच

नवदुर्गा के 9 स्वरूप – नाम, मंत्र, पूजा और महत्व

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माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की क्रमशः आराधना की जाती है। नवदुर्गा के सभी स्वरूपों के मंत्र, पूजा, प्रार्थना और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से पढ़ें:

नवदुर्गा के 9 स्वरूप – नाम, मंत्र, पूजा और महत्व

नवदुर्गा की सभी 9 आरतियाँ

  1. माँ शैलपुत्री आरती – नवरात्रि का पहला दिन
  2. माँ ब्रह्मचारिणी आरती – नवरात्रि का दूसरा दिन
  3. माँ चन्द्रघण्टा आरती – नवरात्रि का तीसरा दिन
  4. माँ कूष्माण्डा आरती – नवरात्रि का चौथा दिन
  5. माँ स्कन्दमाता आरती – नवरात्रि का पाँचवाँ दिन
  6. माँ कात्यायनी आरती – नवरात्रि का छठा दिन
  7. माँ कालरात्रि आरती – नवरात्रि का सातवाँ दिन
  8. माँ महागौरी आरती – नवरात्रि का आठवाँ दिन
  9. माँ सिद्धिदात्री आरती – नवरात्रि का नौवाँ दिन

जय माता दी 🙏