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सोमवार, 14 दिसंबर 2020

Om Namah Shivaya Damru Paani - ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय डमरू पाणि शूल पाणि हे नटराजन नमोः नमो |
Om Namah Shivaya Damru Paani Shool

डमरू पाणि, शूल पाणि, हे नटराजन !नमो नमो, नमो नमो।
शीश गंग, भष्म अंग, करते धारण,
नमो नमो, नमो नमो।।
Om Namah Shivaya Damru Paani


तुम आदि देव, अनादि हो,
तुम अंतहीन अनंत हो।
श्रीमंत हो, भगवंत हो,
हे नाथ गिरिजाकंत हो।।

शशि ललाट, तन विराट, हे त्रिलोचन!
नमो नमो, नमो नमो।
डमरू पाणि, शूल पाणि, हे नटराजन!
नमो नमो, नमो नमो।।


हे इस संपूर्ण चराचर में व्याप्त सृष्टि के स्वामी श्रीराम (श्री विष्णु) के भी आराध्य, एवं उसी श्रीराम के उपासक, इस संसार के रक्षक, अपनी जटाओं में माँ गंगा को धारण करने वाले तथा इस संसार के सर्वश्व ऐश्वर्यों को त्याग कर भष्म भूषित रहने वाले, बाबा नंदी को अपने वाहन के रूप में स्थान देकर गो वंश का रक्षण करने वाले आज इस राष्ट्र को, इस विश्व को और जगत के प्रत्येक प्राणी को आपके कृपा दृष्टि की आवश्यकता है।

भरत श्री राम को अयोध्या का राजा बनाने की ठान लेते हैं और उन्हें मनाने के लिए अपनी माताओं, ऋषि जन एवं मंत्रियों के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैँ। यह सुंदर भक्ति गीत भरत का श्री राम प्रति स्नेह और श्रद्धा की अनुभूति कराता है। 

स्वर : सतीश देहरा 
गीत : रवीन्द्र जैन 
संगीत : रवीन्द्र जैन

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