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बुधवार, 23 दिसंबर 2020

ओ माइयाँ तैने क्या ठानी - O Maiyya Tene Ka Thaani

ओ माइयाँ तैने क्या ठानी मन में | O Maiyya Tene Ka Thaani Mann Mein

ओ मईया तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दये री बन में
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में ।।

जदपि भरत तेरो ही जायो,
तेरी करनी देख लजायो,
अपनों पद तैने आप गँवायो,
भरत की नजरन में,
राम-सिया भेज दये री बन में ,
हठीली तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में ।।

मेहल छोड़ वहाँ नहीं रे मड़ैया,
सिया सुकुमारी,संग दोउ भईया,
काहू वृक्ष तर भीजत होंगे,
तीनों मेहन में,
राम-सिया भेज दये री बन में 
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में ।।
O Maiyya Tene Ka Thaani
कौशल्या की छिन गयी बानी,
रोय ना सकी उर्मिल दीवानी,
कैकेयी तू बस एक ही रानी
रह गयी महलन में,
राम-सिय भेज दये री बन में ।।

ओ मईया तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में ।।


भरत श्री राम को अयोध्या का राजा बनाने की ठान लेते हैं और उन्हें मनाने के लिए अपनी माताओं, ऋषि जन एवं मंत्रियों के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैँ। यह सुंदर भक्ति गीत भरत का श्री राम प्रति स्नेह और श्रद्धा की अनुभूति कराता है। 

स्वर : सतीश देहरा 
गीत : रवीन्द्र जैन 
संगीत : रवीन्द्र जैन


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