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शनिवार, 12 दिसंबर 2020

मेरे लखन दुलारे - Mere Lakhan Dulare song lyrics

मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल | Mere Lakhan Dulare Bol Kachhu Bol


मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल, मत भैया को रुला रे बोल कछु बोल
भैया भैया कह के भैया भैया कह के, रस प्राणों में घोल
मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल...

इस दुनिया में और ना होगा मुझ जैसा हतभागा
मेरे रहते बाण शक्ति का तेरे तन में लागा
जा नहीं सकता तोड़ के ऐसा मुझसे नेह का धागा
में भी अपने प्रण तजूँगा आज जो तू नहीं जागा
अंखियो के तारे अंखियो के तारे लल्ला अंखिया तो खोल
मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल, मत भैया को रुला रे बोल कछु बोल
Mere Lakhan Dulare song lyrics


बीती जाये रेन पवनसुत अब तक नहीं आये
बुझता जाये आस का दीपक मनवा धीर गवाए
सूर्य निकलकर सूर्य वंश का सूर्य डुबो ना जाये
बिना बुलाये बोलने वाले बोले नहीं बुलायेचुप 
चुप रहके चुप चुप रहके मेरा धीरज ना तोल

मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल, मत भैया को रुला रे बोल कछु बोल
भैया भैया कह के भैया भैया कह के, रस प्राणों में घोल

मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल, मत भैया को रुला रे बोल कछु बोल
मेरे लखन दुलारे बोल कछु बोल


रामानन्द सागर द्वारा प्रस्तुत रामायण के लुभावने व भक्ति से भरे श्री राम चंद्र के भजन सुने। लक्ष्मण जब मेघनाथ के बाण से मूर्छित हो गए थे तो श्री राम उन्हें उठने की कोशिश करते हैं। श्री राम विलाप और दुखी मन से अपने दर्द में कैसे तड़पते हैं इस दृश्य को गीत में देखाया गया है।

स्वर- मोहम्मद अज़ीज़ और रवींद्र जैन 
गीत- रवींद्र जैन 
संगीत- रवींद्र जैन

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