Home Mantra स्वस्तिक मंत्र लिरिक्स हिंदी में | स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः

स्वस्तिक मंत्र लिरिक्स हिंदी में | स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः

स्वस्तिक मंत्र लिरिक्स हिंदी में - Swastik Mantra

स्वस्ति मंत्र हिंदू धार्मिक परंपरा में मंगल, कल्याण और शुभकामना की प्रार्थना से जुड़ा प्रसिद्ध वैदिक मंत्र है। इसका लोकप्रिय पाठ “ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः…” से शुरू होता है।

स्वस्तिक एक प्राचीन प्रतीक है जो हिंदू धर्म सहित दुनिया भर की कई संस्कृतियों में शुभता, कल्याण और सौभाग्य का प्रतिनिधित्व करता है।

इस लेख में आपको स्वस्तिक मंत्र का संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, English transliteration, स्वस्तिवाचन का अर्थ, पाठ के अवसर और संबंधित शांति मंत्र की जानकारी मिलेगी।

स्वस्तिक मंत्र की जानकारी

जानकारीविवरण
मंत्र का नामस्वस्ति मंत्र / स्वस्तिक मंत्र
प्रारंभॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः
भाषासंस्कृत
प्रकारवैदिक मंगलकामना मंत्र
प्रमुख प्रयोगस्वस्तिवाचन
मुख्य भावकल्याण, मंगल और शांति की कामना
लोकप्रिय अवसरपूजा, विवाह, गृहप्रवेश, हवन आदि

स्वस्तिक मंत्र क्या है?

स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मंत्र शुभता, कल्याण और मंगल की कामना से जुड़ा वैदिक मंत्र है। इसका प्रमुख पाठ “ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः…” से शुरू होता है।

इसमें विभिन्न देवताओं से कल्याण और मंगल की प्रार्थना की जाती है। इस मंत्र का धार्मिक अनुष्ठानों में पाठ स्वस्तिवाचन के रूप में किया जाता है।

Swastik Mantra Meaning – स्वस्तिक मंत्र का अर्थ

स्वास्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल-प्रतीक माना जाता रहा है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वास्तिक चिह्न अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो।

ऐसा माना जाता है कि इससे हृदय और मन मिल जाते हैं। मंत्रोच्चार करते हुए दर्भ से जल के छींटे डाले जाते थे तथा यह माना जाता था कि यह जल पारस्परिक क्रोध और वैमनस्य को शांत कर रहा है। स्वस्ति मन्त्र का पाठ करने की क्रिया ‘स्वस्तिवाचन’ कहलाती है।‘स्वास्तिक’ शब्द का अर्थ = अच्छा’ या ‘मंगल’ करने वाला

स्वास्तिक’ शब्द में किसी व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं, किन्तु  सम्पूर्ण विश्व के कल्याण या ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना निहित है।

॥ स्वस्ति मंत्र ॥

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Svasti Na Indro Vrddha-Shravaah | Svasti Nah Puussaa Vishva-Vedaah |
Svasti Nas-Taarkssyo Arisstta-Nemih | Svasti No Vrhaspatir-Dadhaatu ||
Om Shaantih Shaantih Shaantih ||

स्वस्ति मंत्र का हिंदी अर्थ

स्वास्तिक मंत्र का अर्थ : हे इंद्र देव, जो महान कीर्ति रखने वाले हैं वह हमारा कल्याण करें। सम्पूर्ण विश्व में ज्ञान के स्वरुप आप हैं पुषादेव हमारा कल्याण करें। जिसका हथियार अटूट है हे गरुड़ भगवान हमारा मंगल करो। हे ब्रहस्पति देव हमारा कल्याण करो।

इस मंत्र का मूल भाव सभी के लिए कल्याण, मंगल और शुभता की प्रार्थना करना है।

स्वस्ति मंत्र का शब्दार्थ

शब्दसरल अर्थ
स्वस्तिकल्याण / मंगल
नःहमारा / हमारे लिए
इन्द्रःइंद्र देव
वृद्धश्रवाःमहान यश वाले
पूषापूषा देव
विश्ववेदाःविश्व के ज्ञाता
तार्क्ष्यःतार्क्ष्य
अरिष्टनेमिःजिसका चक्र/रक्षा साधन अजेय है
बृहस्पतिःबृहस्पति देव
दधातुप्रदान करें / स्थापित करें

स्वस्तिक मंत्र (स्वस्तिवाचन) का अर्थ क्या होता है?

स्वस्तिवाचन का अर्थ है शुभता, कल्याण और मंगल की कामना करते हुए वैदिक मंत्रों का पाठ करना। धार्मिक अनुष्ठानों के आरंभ में स्वस्तिवाचन के माध्यम से सभी के लिए शांति, स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

हमारे पास चारों ओर से ऐंसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। स्वस्तिक मंत्र में चार बार स्वस्ति शब्द आता है जिसका मतलब होता है कि इसमें भी चार बार मंगल और शुभ की कामना से श्री गणेश का ध्यान और आवाहन किया गया है। स्वस्ति वाचन के प्रथम मन्त्र में लगता है स्वस्तिक का ही निरूपण हुआ है। उसकी चार भुजाओं को ईश्वर की चार दिव्य सत्ताओं का प्रतीक माना गया है।

स्वस्तिवाचन के साथ वैदिक मंत्रों की जानकारी के लिए गायत्री मंत्र भी देखें।

स्वस्ति मंत्र का मूल पाठ ऋग्वेद के प्रथम मंडल, सूक्त 89 में मिलता है।

સ્વસ્તિ મંત્ર : ૐ સ્વસ્તિ ન ઇન્દ્રો વૃદ્ધશ્રવાઃ | Swasti Mantra Gujarati

ૐ સ્વસ્તિ ન ઇન્દ્રો વૃદ્ધશ્રવાઃ।સ્વસ્તિ નઃ પૂષા વિશ્વવેદાઃ।
સ્વસ્તિ નસ્તાર્ક્ષ્યો અરિષ્ટનેમિઃ।સ્વસ્તિ નો બ્રિહસ્પતિર્દધાતુ ॥
ૐ શાન્તિઃ શાન્તિઃ શાન્તિઃ ॥

અર્થ: હે મહાન ખ્યાતિના ઇન્દ્ર, અમારું ભલું કરો, હે પુષદેવ, વિશ્વના જ્ઞાનના મૂર્ત સ્વરૂપ, અમારું ભલું કરો. ભગવાન ગરુડ, જેમનું શસ્ત્ર અતૂટ છે, તે આપણને આશીર્વાદ આપે. ગુરુ આપણને આશીર્વાદ આપે.

ॐ એ નો ભદ્રઃ ક્રતવો યન્તુ વિશ્વતો’દબ્ધસો અપરિતાસ ઉદ્ભિદાઃ।
આપણે વૃદ્ધાવસ્થામાં જીવીએ છીએ ત્યારે સ્વર્ગમાં દેવતાઓ આપણા રક્ષક છે (1)

અર્થ – ચારે બાજુથી એવા કલ્યાણકારી વિચારો આવવા દો જે કોઈનાથી પ્રભાવિત ન હોય, ગમે ત્યાંથી અવરોધિત ન થઈ શકે અને અજાણ્યા વિષયો પ્રગટ ન કરી શકે. જે ભગવાન ક્યારેય પ્રગતિમાં અવરોધ નથી લાવતા અને હંમેશા આપણું રક્ષણ કરવા તૈયાર છે, તે આપણને દરરોજ વિકાસ કરવામાં મદદ કરવા તૈયાર રહે.

स्वस्तिक मंत्र कब बोला जाता है?

  1. पूजा के प्रारंभ में
  2. हवन और यज्ञ के अवसर पर
  3. गृहप्रवेश के समय
  4. विवाह संस्कार में

शांति मंत्र (Shanti Mantra)

यजुर्वेद के इस शांति पाठ मंत्र के पठन से साधक परमात्मा से शांति बनाये रखने की प्रार्थना करता है। ब्राह्मण या कोई भी भक्त किसी भी प्रकार के धार्मिक कृत्य, संस्कार, यज्ञ आदि के आरंभ और अंत में इस शांति पाठ के मंत्रों का मंत्रोच्चारण करते हैं।

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,
पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: ।

वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि ॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥

शान्ति: कीजिये, प्रभु त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में,
अन्तरिक्ष में, अग्नि पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में,
सकल विश्व में अवचेतन में!
शान्ति राष्ट्र-निर्माण सृजन, नगर, ग्राम और भवन में
जीवमात्र के तन, मन और जगत के हो कण कण में,
हे परमपिता परमेश्वर शांति हो, शांति हो, शांति हो।

May peace radiate there in the whole sky as well as in the vast ethereal space everywhere.
May peace reign all over this earth, in water and in all herbs, trees and creepers.
May peace flow over the whole universe.
May peace be in the Supreme Being Brahman.
And may there always exist in all peace and peace alone.
Om Shanti, Shanti, Shanti to us and all beings!

संबंधित मंत्र

स्वस्ति मंत्र FAQ

  • स्वस्ति मंत्र क्या है?

    स्वस्ति मंत्र एक वैदिक मंगलकामना मंत्र है जिसका लोकप्रिय पाठ “ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः…” से शुरू होता है।

  • स्वस्ति मंत्र का अर्थ क्या है?

    स्वस्ति मंत्र का मुख्य भाव देवताओं से सभी के कल्याण, मंगल और शुभता की प्रार्थना करना है।

  • स्वस्ति मंत्र कब बोला जाता है?

    इसे पूजा, हवन, विवाह, गृहप्रवेश और अन्य शुभ धार्मिक अवसरों पर स्वस्तिवाचन के रूप में पढ़ा जाता है।

  • स्वस्तिवाचन क्या है?

    शुभता, शांति और कल्याण की कामना करते हुए वैदिक मंत्रों का पाठ करना स्वस्तिवाचन कहलाता है।

  • “स्वस्ति” का अर्थ क्या है?

    “स्वस्ति” का सामान्य अर्थ कल्याण, मंगल या शुभता है।

  • क्या स्वस्ति मंत्र और स्वस्तिक एक ही हैं?

    नहीं। स्वस्तिक एक शुभ प्रतीक है, जबकि स्वस्ति मंत्र मंगल और कल्याण की प्रार्थना करने वाला वैदिक मंत्र है।

निष्कर्ष :

स्वस्ति मंत्र भारतीय वैदिक परंपरा में मंगल, कल्याण और शुभता की प्रार्थना से जुड़ा महत्वपूर्ण मंत्र है। “ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः…” से शुरू होने वाला यह मंत्र विभिन्न धार्मिक और शुभ अवसरों पर स्वस्तिवाचन के रूप में पढ़ा जाता है।

इस पृष्ठ पर आपको स्वस्ति मंत्र का संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, शब्दार्थ, English transliteration, स्वस्तिवाचन का महत्व और संबंधित शांति मंत्र की जानकारी दी गई है।

🙏 ॐ स्वस्तिः। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

2 COMMENTS

Exit mobile version