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मधुराष्टकम् हिंदी अर्थ सहित | अधरं मधुरं वदनं मधुरं

मधुराष्टकम् हिंदी अर्थ सहित

मधुराष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण की मधुरता, सौंदर्य, लीलाओं और दिव्य स्वरूप की स्तुति करने वाला प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। इसकी प्रत्येक पंक्ति में श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों और उनसे जुड़ी वस्तुओं को “मधुर” अर्थात सुंदर, मनोहर और आनंददायक बताया गया है।

मधुराष्टकम् की रचना श्री वल्लभाचार्य से संबंधित मानी जाती है और यह कृष्ण-भक्ति की प्रसिद्ध स्तुतियों में शामिल है।

इस लेख में आपको मधुराष्टकम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, Gujarati पाठ, English transliteration, मधुराष्टकम् का भावार्थ, रचयिता और प्रमुख FAQ मिलेंगे।

भगवान श्रीकृष्ण की अन्य भक्ति रचनाओं के लिए श्रीकृष्ण मंत्र और श्री कृष्ण के उपदेश भी पढ़ें।

मधुराष्टकम् की जानकारी:

जानकारीविवरण
स्तोत्र का नाममधुराष्टकम्
लोकप्रिय आरंभअधरं मधुरं वदनं मधुरं
रचयिताश्री वल्लभाचार्य
समर्पितभगवान श्रीकृष्ण
भाषासंस्कृत
श्लोक8
प्रमुख भावश्रीकृष्ण की दिव्य मधुरता और भक्ति
परंपरावैष्णव भक्ति परंपरा

मधुराष्टकम् क्या है?

मधुराष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति में रचित आठ श्लोकों का प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है। इसमें श्रीकृष्ण के अधर, मुख, नेत्र, मुस्कान, हृदय, चाल, वचन, चरित्र, बांसुरी, चरण, नृत्य, लीलाओं, गोपियों, गोपों और गायों सहित अनेक स्वरूपों को “मधुर” कहा गया है।

“मधुर” शब्द की लगातार पुनरावृत्ति इस स्तोत्र की विशेषता है। इसका मूल भाव यह है कि श्रीकृष्ण के स्वरूप, उनकी लीला और उनसे जुड़ी प्रत्येक वस्तु भक्त के लिए मधुर और आनंददायक है।

मधुराष्टकम् की रचना किसने की?

मधुराष्टकम् की रचना श्री वल्लभाचार्य से संबंधित मानी जाती है। वे वैष्णव भक्ति परंपरा के प्रमुख आचार्यों में से एक थे।

इस स्तोत्र में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, भक्ति और माधुर्य-भाव को अत्यंत सुंदर संस्कृत भाषा में व्यक्त किया गया है।

मधुराष्टकम – अर्थ साहित : अधरं मधुरं वदनं मधुरं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपकी चाल मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।।

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥२॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपके वचन मधुर है, चरित्र मधुर है, उनके वस्त्र मधुर हैं, उनका आसन मधुर है। उनकी गति मधुर है, उनका विचरण (घूमना) मधुर है, मधुरत्व के ईश्वर श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥३॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपकी बांसुरी मधुर है, उनके पैरों की धूल मधुर है, उनके हाथ मधुर हैं, उनके पैर मधुर हैं। नृत्य मधुर है, उनके मित्र मधुर हैं, मधुरत्व के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥४॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपके गीत मधुर हैं, उनका पीना मधुर है, उनका भोजन करना मधुर है, शयन मधुर है, उनका सुन्दर रूप मधुर है, तिलक मधुर है, मधुरत्व के ईश्वर श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥५॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपके कर्म मधुर हैं, तारना (मुक्ति देना) मधुर है, उनका चोरी करना मधुर है, उनका रास मधुर है, उनके नैवेद्य मधुर हैं, उनकी मुखाकृति मधुर है, मधुरत्व के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥६॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपके गुंजा-हार मधुर है, माला मधुर है, यमुना मधुर है और यमुना की कल-कल करती लहरें मधुर हैं, उसका पानी मधुर है, कमल मधुर हैं, मधुरत्व के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥७॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपकी गोपियाँ मधुर हैं, उनकी लीला मधुर है, [उनका और आपका] युगल मधुर है, [कृष्ण] उनके बिना भी मधुर हैं। [उनकी] तिरछी नजरें मधुर हैं, उनका शिष्टाचार भी मधुर है, मधुरत्व के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥८॥

हिंदी अर्थ : (हे कृष्ण!) आपके गोप (ग्वाले) मधुर हैं, गायें मधुर हैं, [गायों को] हांकने की छड़ी मधुर है, [उनके द्वारा की गई] सृष्टि (निर्माण) मधुर है और विनाश मधुर है, उनका वर देना मधुर है, मधुरत्व के स्वामी श्री कृष्ण का सब कुछ मधुर है।।

मधुराष्टकम् का भावार्थ

मधुराष्टकम् का मुख्य भाव श्रीकृष्ण के माधुर्य का अनुभव है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के शरीर, मुस्कान, वाणी, चरित्र, बांसुरी, नृत्य, सख्य, गोपियों, गोपों, गायों और उनकी लीलाओं तक को मधुर बताया गया है।

भक्त की दृष्टि में भगवान का केवल स्वरूप ही नहीं, बल्कि उनकी लीला और उनसे जुड़ा प्रत्येक तत्व प्रेम और आनंद से भरा हुआ है। इसी भाव को “मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्” की पुनरावृत्ति सुंदर रूप से व्यक्त करती है।

मधुराष्टकम् का पाठ कब करें?

  • श्रीकृष्ण पूजा
  • जन्माष्टमी
  • दैनिक पूजा
  • भजन-स्मरण
  • मंदिर में कृष्ण आराधना

મધુરાષ્ટકમ ગુજરાતી | અધરં મધુરં વદનં મધુરં

અધરં મધુરં, વદનં મધુરં, નયનં મધુરં, હસિતં મધુરમ્ ।
હૃદયં મધુરં, ગમનં મધુરં, મધુરાધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૧॥

અર્થ: શ્રીકૃષ્ણ નું અધર (ઓષ્ઠ) મધુર છે, મુખ મધુર છે, નયન મધુર છે, હાસ્ય મધુર છે, હ્રદય મધુર છે, ગતિ મધુર છે, મધુરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે

વચનં મધુરં, ચરિતં મધુરં, વસનં મધુરં, વલિતં મધુરમ્ ।
ચલિતં મધુરં, ભ્રમિતં મધુરં, મધુરાધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૨॥

અર્થ: શ્રીકૃષ્ણ નું બોલવું મધુર છે, ચરિત્ર મધુર છે, વસ્ત્ર મધુર છે, અંગનો મરોડ મધુર છે, ચાલ મધુર છે, ભ્રમણ મધુર છે, મધુરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે.

વેણુર્મધુરો, રેણુર્મધુરઃ, પાણિર્મધુરઃ, પાદૌ મધુરૌ ।
નૃત્યં મધુરં, સખ્યં મધુરં, મધુરાધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૩॥

શ્રીકૃષ્ણ નું વેણુ મધુર છે, ચરણ રજ મધુર છે, હાથ મધુર છે, પગ મધુર છે, નૃત્ય મધુર છે, સખ્ય (મૈત્રી) મધુર છે, મધિરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે.

ગીતં મધુરં, પીતં મધુરં, ભુક્તં મધુરં, સુપ્તં મધુરમ્ ।
રૂપં મધુરં, તિલકં મધુરં, મધુરધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૪॥

અર્થ: શ્રીકૃષ્ણ નું ગાન મધુર છે, પાન મધુર છે, ભોજન મધુર છે, શયન મધુર છે, રૂપ મધુર છે, તિલક મધુર છે, મધુરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે.

કરણં મધુરં, તરણં મધુરં, હરણં મધુરં, રમણં મધુરમ્ ।
વમિતં મધુરં, શમિતં મધુરં, મધુરધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૫॥

અર્થ: શ્રીકૃષ્ણ નું કાર્ય મધુર છે, તરવું મધુર છે, હરવું મધુર છે, સ્મરણ મધુર છે, ઉદગાર મધુર છે, શાંતિ મધુર છે, મધુરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે.

ગુંજા મધુરા, માલા મધુરા, યમુના મધુરા, વીચી મધુરા ।
સલિલં મધુરં, કમલં મધુરં, મધુરધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૬॥

અર્થ: શ્રીકૃષ્ણ નું ગુંજન મધુર છે, માળા મધુર છે, યમુના મધુર છે, તેના તરંગો મધુર છે, તેના જળથી ભીની થયેલા માટી મધુર છે, કમળ મધુર છે, મધુરાધિપતિનુ સર્વસ્વ મધુર છે.

ગોપી મધુરા, લીલા મધુરા, યુક્તં મધુરં, મુક્તં મધુરમ્ ।
દૃષ્ટં મધુરં, શિષ્ટં મધુરં, મધુરધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૭॥

અર્થ: ગોપીઓ મધુર છે, એમની લીલા મધુર છે, સંયોગ મધુર છે, ભોગ મધુર છે, નિરીક્ષણ મધુર છે, શિષ્ટાચાર મધુર છે, મધુરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે.

ગોપા મધુરા, ગાવો મધુરા, યષ્ટિર્મધુરા, સૃષ્ટિર્મધુરા ।
દલિતં મધુરં, ફલિતં મધુરં, મધુરધિપતેરખિલં મધુરમ્ ॥ ૮॥

અર્થ: ગોવાળ મધુર છે, ગાયો મધુર છે, લાકડી મધુર છે, સૃષ્ટિ મધુર છે, દલન મધુર છે, ફળ મધુર છે, મધુરાધિપતિનું સર્વસ્વ મધુર છે.

Madhurashtakam Lyrics in English | Adharam Madhuram

Madhurashtakam is a Sanskrit devotional hymn dedicated to Lord Krishna. Below is the Roman transliteration of the eight verses along with a simple English meaning.

Adharam Madhuram Vadanam Madhuram Nayanam Madhuram Hasitam Madhuram
Hridayam Madhuram Gamanam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 1 ||

Meaning in English : (Krishna’s) lips are sweet, (his) face is sweet, (his) eyes are sweet and 
(his) smile is sweet. (Krishna’s) heart is sweet and (his) walk is sweet. 
Everything is sweet about the lord of sweetness. 

Vachanam Madhuram Charitam Madhuram Vasanam Madhuram Valitam Madhuram
Chalitam Madhuram Bhramitam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 2 ||

Meaning in English : (Krishna’s) words are sweet, (his) character is sweet, (his) garments are sweet and
 (his) posture is sweet. (Krishna’s) movements are sweet and (his) 
wandering is sweet.Everything is sweet about the lord of sweetness. 

Venur Madhuro Renur Madhurah Panir Madhurah Padau Madhurau
Nrityam Madhuram Shakhyam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 3 ||

Meaning in English : (Krishna’s) flute-playing is sweet, (his) foot-dust is sweet, 
(his) hands are sweet and (his) feet are sweet. (Krishna’s) dancing is sweet and 
(his) company is sweet.Everything is sweet about the lord of sweetness.   

Gitam Madhuram Pitam Madhuram Bhuktam Madhuram Suptam Madhuram
Rupam Madhuram Tilakam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 4 ||

Meaning in English : (Krishna’s) song is sweet, (his) drinking is sweet, (his) eating is sweet and 
(his)sleeping are sweet. (Krishna’s) beautiful form is sweet and (his) 
’tilak’ is sweet. Everything is sweet about the lord of sweetness. 

Karanam Madhuram Taranam Madhuram Haranam Madhuram Ramanam Madhuram
Vamitam Madhuram Shamitam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 5 ||

Meaning in English : (Krishna’s) deeds are sweet, (his) conquest is sweet, (his) stealing is sweet and 
(his) love-play is sweet. (Krishna’s) exuberance is sweet and (his) relaxation is 
sweet. Everything is sweet about the lord of sweetness. 

Gunja Madhura Mala Madhura Yamuna Madhura Vici Madhura
Salilam Madhuram Kamalam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 6 ||

Meaning in English : (Krishna’s) gunja-berry necklace is sweet, (his) garland is sweet, (his) 
Yamuna river is sweet and (his) Yamuna’s waves are sweet. (Krishna’s) 
Yamuna’s water is sweet and (his) lotus flowers are sweet. Everything is sweet 
about the lord of sweetness. 

Gopi Madhura Lila Madhura Yuktam Madhuram Muktam Madhuram
Dhristam Madhuram Shistam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 7 ||

Meaning in English : (Krishna’s) ‘gopis’ are sweet, (his) frolicking is sweet, (his) union is sweet and 
(his) deliverance is sweet. (Krishna’s) glances are sweet and (his) 
etiquette is sweet. Everything is sweet about the lord of sweetness. 

Gopa Madhura Gavo Madhura Yastir Madhura Shristhir Madhura
Dalitam Madhuram Phalitam Madhuram Madhur-Adipater Akhilam Madhuram || 8 ||

Meaning in English : (Krishna’s) ‘gopas’ are sweet, (his) cows are sweet, (his) herding stick is sweet and 
(his) creation is sweet. (Krishna’s) breaking is sweet and (his) bringing to 
fruition is sweet. Everything is sweet about the lord of sweetness.

मधुराष्टकम् FAQ

  1. मधुराष्टकम् किसने लिखा है?

    मधुराष्टकम् की रचना श्री वल्लभाचार्य से संबंधित मानी जाती है।

  2. मधुराष्टकम् में कितने श्लोक हैं?

    मधुराष्टकम् में आठ श्लोक हैं।

  3. मधुराष्टकम् किस भगवान को समर्पित है?

    यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।

  4. मधुराष्टकम् का मुख्य भाव क्या है?

    इसका मुख्य भाव भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य माधुर्य, सौंदर्य, प्रेम और लीलाओं की स्तुति है।

  5. मधुराष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?

    इसे श्रीकृष्ण की पूजा, भजन, स्मरण या दैनिक भक्ति के समय अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पढ़ा जा सकता है।

निष्कर्ष

मधुराष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य माधुर्य और उनकी लीलाओं की सुंदर स्तुति है। इसके आठों श्लोकों में श्रीकृष्ण के स्वरूप, वाणी, मुस्कान, बांसुरी, नृत्य, लीलाओं और उनसे जुड़े विभिन्न तत्वों को मधुर बताया गया है।

इस पृष्ठ पर आपको मधुराष्टकम् का संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ, Gujarati पाठ, English transliteration, भावार्थ और महत्वपूर्ण FAQ उपलब्ध कराया गया है।

🙏 जय श्रीकृष्ण।

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