Home Lyrics माँ चन्द्रघण्टा आरती: जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम | Chandraghanta Aarti Lyrics

माँ चन्द्रघण्टा आरती: जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम | Chandraghanta Aarti Lyrics

माँ चन्द्रघण्टा आरती – जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम

माँ चन्द्रघण्टा आरती (Maa Chandraghanta Aarti) नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चन्द्रघण्टा की आराधना में गाई जाती है। माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचन्द्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चन्द्रघण्टा कहा जाता है।

नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त माँ चन्द्रघण्टा की पूजा, मंत्र-जप, प्रार्थना और आरती करते हैं तथा उनसे साहस, शांति, सद्बुद्धि और भक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।

यहाँ पढ़ें माँ चन्द्रघण्टा की सम्पूर्ण आरती – “जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम”, साथ ही आरती का सरल अर्थ, मंत्र और पूजा का महत्व।


माँ चन्द्रघण्टा आरती | Maa Chandraghanta Aarti

चन्द्र समान तू शीतल दाती।
चन्द्र की किरणों-सी मन भाती॥
मन की पीड़ा हरने वाली।
चन्द्रघण्टा माँ वर देने वाली॥

॥ जय माँ चन्द्रघण्टा ॥

जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥
जय माँ चन्द्रघण्टा… जय भवानी…
भक्तों की रक्षा करो भवानी॥


सुन्दर भाव जगाने वाली।
हर संकट में राह दिखाने वाली॥
श्रद्धा से जो तुझको ध्याये।
सन्मुख तेरे ज्योति जलाये॥

॥ जय माँ चन्द्रघण्टा ॥

जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥
जय माँ चन्द्रघण्टा… जय भवानी…
जय माँ चन्द्रघण्टा… जय भवानी…
भक्तों की रक्षा करो भवानी॥


श्रद्धा सहित जो विनय सुनाये।
माँ के चरणों में शीश झुकाये॥
मन की अपनी बात बताये।
माँ से शुभ आशीष वह पाये॥

॥ जय माँ चन्द्रघण्टा ॥

जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥
जय माँ चन्द्रघण्टा… जय भवानी…
भक्तों की रक्षा करो भवानी॥


मस्तक पर अर्धचन्द्र सुहाये।
दिव्य रूप माँ मन को भाये॥
शक्ति-स्वरूपा हे महारानी।
जय चन्द्रघण्टा, जय भवानी॥

॥ जय माँ चन्द्रघण्टा ॥

जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥
जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥

जय माँ चन्द्रघण्टा… जय भवानी…
जय माँ चन्द्रघण्टा… जय भवानी…


नाम तेरा जपूँ महारानी।
भक्ति प्रदान करो कल्याणी॥
मन में माँ विश्वास जगाओ।
अपने चरणों में स्थान दिलाओ॥

जय माँ चन्द्रघण्टा…
जय माँ चन्द्रघण्टा…

जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥

॥ जय माँ चन्द्रघण्टा ॥


माँ चन्द्रघण्टा आरती का सरल अर्थ

इस आरती में भक्त माँ चन्द्रघण्टा के शांत, दिव्य और शक्तिशाली स्वरूप का स्मरण करता है।

माँ के मस्तक पर सुशोभित अर्धचन्द्र उनके विशिष्ट स्वरूप की पहचान है। भक्त माँ के चरणों में अपने मन की बात रखकर उनसे साहस, सद्बुद्धि, भक्ति और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति माँगता है।

आरती का मुख्य भाव है—

“हे माँ चन्द्रघण्टा! हमारे मन में विश्वास और भक्ति जगाएँ। हमें भय और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति दें तथा अपने चरणों में हमारी श्रद्धा बनाए रखें।”


माँ चन्द्रघण्टा कौन हैं?

माँ चन्द्रघण्टा नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी विशेष आराधना की जाती है।

माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचन्द्र सुशोभित होने के कारण उनका नाम चन्द्रघण्टा प्रसिद्ध है।

माँ का स्वरूप शक्ति और शांति का सुंदर समन्वय माना जाता है। धार्मिक परंपरा में भक्त उनसे भय का सामना करने का साहस, मन की शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।


नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चन्द्रघण्टा की आरती

नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चन्द्रघण्टा की उपासना को समर्पित माना जाता है।

इस दिन भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार माँ का पूजन करते हैं। पूजा के बाद माँ चन्द्रघण्टा की आरती की जा सकती है।

आरती करते समय केवल सांसारिक मनोकामनाओं के बजाय माँ से भक्ति, सद्बुद्धि, साहस, शांति और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति भी माँगें।


माँ चन्द्रघण्टा का मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

सरल अर्थ

माँ चन्द्रघण्टा को मेरा नमस्कार है।

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ के ध्यान और पूजा के समय इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है।


माँ चन्द्रघण्टा प्रार्थना

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

सरल भावार्थ

माँ चन्द्रघण्टा के दिव्य और शक्तिशाली स्वरूप का ध्यान करते हुए भक्त उनसे कृपा और आशीर्वाद प्रदान करने की प्रार्थना करता है।


माँ चन्द्रघण्टा की आरती कैसे करें?

माँ चन्द्रघण्टा की आराधना अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार करें।

सामान्य भक्तिपूजन में:

  1. पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
  2. माँ चन्द्रघण्टा का ध्यान करें।
  3. दीप प्रज्वलित करें।
  4. ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ मंत्र का स्मरण करें।
  5. श्रद्धापूर्वक माँ की आरती करें।
  6. अंत में अपनी भूलों के लिए क्षमा और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य के मार्गदर्शन का पालन किया जा सकता है।


माँ चन्द्रघण्टा की पूजा का महत्व

नवरात्रि की धार्मिक परंपरा में तीसरे दिन माँ चन्द्रघण्टा की आराधना की जाती है।

माँ का स्वरूप भक्त को साहस और शांति के संतुलन की प्रेरणा देता है।

उनकी उपासना करते समय भक्त भय, चिंता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति तथा मन की शांति की प्रार्थना करते हैं।

इसे किसी निश्चित सांसारिक परिणाम की गारंटी के बजाय श्रद्धा और देवी-भक्ति की साधना के रूप में समझना उचित है।


माँ चन्द्रघण्टा आरती कब करें?

माँ चन्द्रघण्टा की आरती विशेष रूप से—

  • नवरात्रि के तीसरे दिन
  • माँ चन्द्रघण्टा की पूजा के बाद
  • प्रातःकालीन देवी पूजा
  • संध्या पूजा
  • दुर्गा पूजा
  • माता की चौकी
  • दैनिक देवी उपासना

के समय की जा सकती है।


माँ चन्द्रघण्टा आरती FAQ

माँ चन्द्रघण्टा की पूजा नवरात्रि के किस दिन होती है?

माँ चन्द्रघण्टा नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं और उनकी पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है।

माँ चन्द्रघण्टा की आरती कौन-सी है?

जय माँ चन्द्रघण्टा सुखधाम।
पूर्ण करो माँ शुभ मनकाम॥

माँ चन्द्रघण्टा का मंत्र क्या है?

माँ चन्द्रघण्टा का सरल मंत्र है: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

माँ का नाम चन्द्रघण्टा क्यों पड़ा?

माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचन्द्र सुशोभित होने के कारण उनका नाम चन्द्रघण्टा माना जाता है।

माँ चन्द्रघण्टा की आरती कब करनी चाहिए?

नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा के बाद माँ चन्द्रघण्टा की आरती करना विशेष रूप से प्रचलित है। श्रद्धालु अन्य दिनों में भी देवी-पूजन के समय आरती कर सकते हैं।

माँ चन्द्रघण्टा से क्या प्रार्थना करें?

भक्त माँ से साहस, शांति, सद्बुद्धि, भक्ति और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना कर सकते हैं।


नवदुर्गा के 9 स्वरूप

नवरात्रि के नौ दिनों में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है:

  1. माँ शैलपुत्री
  2. माँ ब्रह्मचारिणी
  3. माँ चन्द्रघण्टा
  4. माँ कूष्माण्डा
  5. माँ स्कन्दमाता
  6. माँ कात्यायनी
  7. माँ कालरात्रि
  8. माँ महागौरी
  9. माँ सिद्धिदात्री

नवरात्रि के प्रत्येक दिन संबंधित देवी के मंत्र, प्रार्थना, स्तोत्र, कवच और आरती पढ़कर नवदुर्गा के स्वरूपों को समझा जा सकता है।


माँ चन्द्रघण्टा से प्रार्थना

हे माँ चन्द्रघण्टा!

हमारे हृदय में भक्ति और विश्वास बनाए रखें। कठिन परिस्थितियों में हमें धैर्य और साहस दें तथा सही निर्णय लेने का विवेक प्रदान करें।

हमारे विचारों में सकारात्मकता और व्यवहार में करुणा का भाव बना रहे।

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

जय माँ चन्द्रघण्टा 🙏


माँ चन्द्रघण्टा से जुड़ी अन्य भक्तिमय सामग्री

माँ चन्द्रघण्टा नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। माँ की आरती के साथ उनके मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तोत्र और कवच भी पढ़ें।

माँ चन्द्रघण्टा मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तोत्र और कवच

पिछली और अगली नवरात्रि आरती

← माँ ब्रह्मचारिणी आरती – नवरात्रि का दूसरा दिन

माँ कूष्माण्डा आरती – नवरात्रि का चौथा दिन →

नवदुर्गा के 9 स्वरूप – नाम, मंत्र, पूजा और महत्व


माँ चन्द्रघण्टा मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तोत्र और कवच

नवदुर्गा के 9 स्वरूप


माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की क्रमशः आराधना की जाती है। नवदुर्गा के सभी स्वरूपों के मंत्र, पूजा, प्रार्थना और आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से पढ़ें:

नवदुर्गा के 9 स्वरूप – नाम, मंत्र, पूजा और महत्व

नवदुर्गा की सभी 9 आरतियाँ

  1. माँ शैलपुत्री आरती – नवरात्रि का पहला दिन
  2. माँ ब्रह्मचारिणी आरती – नवरात्रि का दूसरा दिन
  3. माँ चन्द्रघण्टा आरती – नवरात्रि का तीसरा दिन
  4. माँ कूष्माण्डा आरती – नवरात्रि का चौथा दिन
  5. माँ स्कन्दमाता आरती – नवरात्रि का पाँचवाँ दिन
  6. माँ कात्यायनी आरती – नवरात्रि का छठा दिन
  7. माँ कालरात्रि आरती – नवरात्रि का सातवाँ दिन
  8. माँ महागौरी आरती – नवरात्रि का आठवाँ दिन
  9. माँ सिद्धिदात्री आरती – नवरात्रि का नौवाँ दिन

जय माता दी 🙏

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