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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

शिशुपाल का वध की कहानी | Shishupal vadh Mahabharat story in hindi

Shishupal vadh Mahabharat story Krishna Ramanand sagar - शिशुपाल वध


शिशुपाल, वासुदेवजी की बहन तथा छेदी के महाराज दमघोष का पुत्र था. जो कि भगवान श्रीकृष्ण की बुआ का पुत्र था  इस प्रकार वो भगवान श्रीकृष्ण का भाई था.

Shishupal Vadh Mahabharat



महाभारत काल में जब कुरु कुल में कौरवों और पांडवों के बीच महाराज पांडू के ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर को युवराज घोषित करने का निर्णय लिया गया, तो इस शुभ प्रसंग के लिए राजसूय यज्ञ आयोजित करने का निर्णय लिया गया. इस हेतु सभी संबंधियों, रिश्तेदारों सहित अनेक राजाओ एवम् अन्य प्रतिष्ठित महानुभावो को आमंत्रित किया गया, तब वासुदेव श्री कृष्ण को भी आमंत्रित किया गया क्योकिं महारानी कुंती उनकी बुआ थी तथा शिशुपाल भी इस यज्ञ में शामिल हुआ, क्योकिं वह कौरवो एवं पांड्वो का भी भाई था. इस समय एक बार फिर भगवान श्री कृष्ण और शिशुपाल का आमना – सामना हुआ.

शिशुपाल, भगवान श्री कृष्ण से क्रोधित था, जिसका कारण था -: भगवान श्री कृष्ण का राजकुमारी रुक्मणी के साथ विवाह करना.



भगवान श्री कृष्ण ने राजकुमारी रुक्मणी से विवाह किया था. परन्तु राजकुमारी रुक्मणी का विवाह उनके भाई राजकुमार रुक्मी ने अपने परम मित्र शिशुपाल के साथ करना निश्चित किया था. विवाह के सारे आयोजन हो चुके थे, परन्तु राजकुमारी रुक्मणी भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी और उन्ही से विवाह करना चाहती थी और राजकुमार रुक्मी ऐसा नहीं होने देना चाहते थे . तब भगवान श्री कृष्ण राजकुमारी रुक्मणी को महल से भगाकर ले गये और उनसे विवाह कर लिया. तब शिशुपाल ने इसे भगवान श्री कृष्ण द्वारा किया गया अपना अपमान समझा और भगवान श्री कृष्ण को अपना भाई न समझ कर शत्रु मान बैठा

शिशुपाल का वध (Shishupal vadh Mahabharat)


महाभारत काल में राजकुमार युधिष्ठिर के युवराज्याभिशेक के समय, युवराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण को सर्वप्रथम भेंट आदि प्रदान की और सम्मानित किया, तब शिशुपाल से भगवान श्री कृष्ण का सम्मान देखा न गया और क्रोध से भरा बैठा शिशुपाल बोल उठा कि“ एक मामूली ग्वाले को इतना सम्मान क्यों दिया जा रहा हैं जबकि यहाँ अन्य सम्मानीय जन उपस्थित हैं” और शिशुपाल ने भगवान श्री कृष्ण को अपमानित करना प्रारंभ कर दिया. शिशुपाल भगवान श्री कृष्ण को अपशब्द कहे जा रहा था, उनका अपमान किये जा रहा था, परन्तु भगवान श्री कृष्ण उनकी बुआ एवं शिशुपाल की माता को दिए वचन के कारण बंधे थे, अतः वे अपमान सह रहे थे और जैसे ही शिशुपाल ने सौ अपशब्द पूर्ण किये और 101वां अपशब्द कहा, भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र का आव्हान किया और इससे शिशुपाल का वध कर दिया. इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया.

शिक्षा (शिशुपाल वध महाभारत Moral )–

इस कथा में भगवान श्री कृष्ण की सहनशीलता, क्षमा करने की शक्ति और बड़ो की बात को आदरपूर्वक पूर्ण करने की शिक्षा मिलती हैं.

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जय श्री कृष्ण

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