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शनिवार, 12 दिसंबर 2020

कागा संघ खेले - Kaga sang khele song lyrics

कागा संघ खेले राम सलोने - Kaga sang khele song lyrics

कागा संघ खेले राम सलोने कागा द्संघ खेले
धरणि परे पुनि पाचे नावट कागा हरी के हाथ न आवत
सबको खेल खेलाने वाले भगवन खग को खेल खेलावे
हाथ जो आवे तो प्रभु मुसकावे उडी उडी जवई तो प्रभु लगे रोने
लोकालोक भ्रमत मेरी पद गयी मंद उड़ान
होय पराजित में परो राम चरण मे आन
दीन डायल दया करके तब मोहे चतुर्भुझ रूप दिखायो

Kaga sang khele song lyrics



काक रे काक तू मांग रे मांग तेरो अनुराग मेरे मन भायों
संपती देहु के सद गति देहु वो देहु मे आज जो तोहे सुहायो
रिद्धि के सिद्धि के मुक्ति मे देहु के देहूँ वो दान जो कोई ना पायो



श्री राम के बचपन में कागभुशुंडि उनसे खेलने के लिए काग रूप में आया करते थे। इस दृश्य को नारद जी भी देखकर अनन्द उठाया करते थे। कागभुशुंडि यही वाक्य गरुड़ राज को सुनते हैं।

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