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Monday, October 5, 2020

श्री महागणेश की कहानी | Shree Ganesh Story

श्री महागणेश की कहानी

वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

ऊँ गं गणपतये नमो नमः   ऊँ गं गणपतये नमो नमः    ऊँ गं गणपतये नमो नमः

अर्थात्- आपका एक दांत टूटा हुआ है तथा आप की काया विशाल है और आपकी आभा करोड़ सूर्यों के समान है। मेरे कार्यों में आने वाली बाधाओं को सर्वदा दूर करें।

Shree_Ganesh_Story

भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रतीक देवों में भगवान गणेश का प्रमुख स्थान हैं। एकदंत, गजानन, लंबोदर, गणपति, विनायक ऐसे सहस्र नामों से भगवान गणेश को पुकारा गया है। हिंदू धर्म में श्रीगणेश की महिमा को अन्य देवताओं की तुलना में अलग से स्वीकारा गया हैं। वेदों और पुराणों में गणेश को यश, कीर्ति, पराक्रम, वैभव, ऐश्वर्य, सौभाग्य, सफलता, धन, धान्य, बुद्धि, विवेक और ज्ञान के देवता बताया गया है

शिव पुराण के अनुसार पार्वती जी ने अपने शरीर के अनुलेप से एक मानवाकृति निर्मित की और उसे आज्ञापति किया कि मैं स्नान करने जा रही हूँ जब तक न कहूँ तक तक तुम किसी को अन्दर मत आने देना । यही गृहद्वार रक्षक शक्ति “गणेश” के नाम सेअभिहित हुई और इन्हीं के साथ भगवान शंकर का संग्राम हुआ ।’ गणपति अथर्वशीर्ष एक नव्य उपनिषद् हैं और अथर्ववेद से सम्बन्धित हैं । इस उपनिषद् में गणेश विद्या बतलायी गयी है । इसी कारण गणेशोपासकों में वह अत्यन्त सम्मानित है । गणपति अथर्वशीर्ष में गणेशजी का सगुण ब्रह्मात्मक वर्णन तो है ही बल्कि उसके अन्त में उन्हें परब्रह्म भी कहा गया है। अथर्वशिरस उपनिषद् में रूद्र का अभिज्ञान अनेक देवताओं से किया गया है, जिनमें एक विनायक कहे गये हैं।

ब्रह्म वैवर्त पुराण, स्कन्द पुराण तथा शिव पुराण के अनुसार प्रजापति विश्वकर्मा की बुद्धि-सिद्धि नामक दो कन्याएं गणेश जी की पत्नियां हैं। सिद्धि से शुभ और बुद्धि से लाभ नाम के दो कल्याणकारी पुत्र हुए।

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