Update

Saturday, April 13, 2019

श्रीराम के दिव्य गुण | Ramayan Shree Ram ke gun

श्रीराम के दिव्य गुण से शिक्षा  | Ramayan shreeRam ke gun

रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था | भगवान राम अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र थेl

रामनवमी के अवसर पर इस कहानी में हम भगवान श्रीराम के गुणों को अपने जीवन में उतार ने का प्रयास करेंगे जो हमे अपने जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाने में मदद करेगा

Ramayan shreeRam ke gun











तो दोस्तों आइये जानते हे भगवान् श्रीराम के उन गुणों को

1 . पिता का सम्मान

राजा बनने जा रहे भगवान श्री राम ने पिता के वचन का सम्मान करते हुए वन जाना सहर्ष स्वीकार किया किसीसे कोई प्रश्न नहीं किया यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन में पिता का सम्मान करना चहिये

2 माता का सम्मान

भगवान श्रीराम माता कैकेयी की इच्छा का सम्मान करते हुए वन जानें तैयार हो गए । पिता दशरथ उन्हें रोकने की तमाम कोशिशें करते हैं, लेकिन भगवान् श्री राम ने माता की इच्छा का सम्मान करते हुए हंसकर 14 साल का वनवास स्वीकार कर लिया यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन में माता का सम्मान करना चहिये

3 गुरु का आदर

भगवान श्री राम जी ने हंमेशा गुरु की भक्ति की है, और विकत परिस्थिति आने पर गुरु से सलाह लेकर ही आगे बड़े यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन में विकत परिस्थिति आने पर गुरु से सलाह लेनी चहिये और गुरु का आदर करना चाहिए

4 कर्म

श्रीराम भगवान विष्णु के अवतार थे.और उनके लिए दुनिया में कुछ भी करना संभव था किन्तु फिर भी इन्होनें अपने कर्म कर्मो का त्याग नहीं किया और अच्छे कर्म करते रहे यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन अच्छे कर्म करते रहना चाहिए

5 अहंकार का त्याग

भगवान श्री राम को न तो अपने ज्ञान का अहंकार था और न ही अपनी शक्ति पर अभिमान था, इसलिए उनकी जीत हुई। जबकि रावण महाज्ञानी था, लेकिन उसके अंदर अहंकार था जिस वजह से उसका सर्वनाश हुआ। यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन अहंकार का त्याग करना चाहिए

6 सबसे समान व्यवहार : (आचरण)

रामायण में भगवान् श्री राम ने सबसे समान व्यवहार किया। चाहे सबरी हो या केवट । श्री राम की नजर में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं था। उन्होंने सबरी के झूठे बेर भी खाए और केवट की नाव पर भी बैठे। यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन सबसे सामान व्हवहार करना चाहिए

7 मानवता

मानवता परमो धर्म: मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है. भगवान् श्री राम ने हमेशा मानवता को सबसे बड़ा धर्म माना है. युद्ध ना हो इसलिए भगवान श्री राम ने अंत तक हर संभव प्रयास किये | यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन में मानवता के लिए लड़ाई झगड़े को रोकने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए

8 धैर्य

जीवन की किसी भी घड़ी में भगवान श्रीराम ने अपना धैर्य नहीं खोया | विपरीत परिस्थियों में भी अपने आदर्शों को नहीं त्यागा और मर्यादा में रहते हुए जीवन व्यतीत किया। यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन में धैर्य बरकरार रखने का हर संभव प्रयास करना चाहिए

9 मित्र धर्म

केवट हो या सुग्रीव, निषादराज या विभीषण। हर जाति, हर वर्ग के मित्रों के साथ भगवान श्री राम ने दिल से करीबी रिश्ता निभाया। मित्रो के लिए उन्होंने स्वयं कई संकट भी जेले | यह हमे सीखता हे की हमे भी अपने जीवन में मित्रधर्म निभाने का प्रयास करना चाहिए

उसके अलावा भगवान श्रीराम ने जिम्मेदारी के साथ एक पुत्र, पति, भाई , एक राजा के कर्तव्यों का पालन किया और उनके प्रेम और दया भाव जैसे गुणों को हम अपने जीवन में अपनाएंगे तो हमारा जीवन भी सुख से भर जायेगा


रामनवमी उन्हीं सब बातों को याद करने का और अपनी ज़िन्दगी में अपनाने का दिन हैl अतः इस रामनवमी हम सभी भगवान राम के महान आदर्श को अपनी जिन्दगी में अपनाएं और उनके आशीर्वाद से अपना जीवन सफल बनाएंl

No comments:

Post a Comment

Auto