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Wednesday, January 23, 2019

महाभारत यक्ष-युधिष्ठिर संवाद | yaksha yudhisthira samvad

Mahabharat Yaksha Yudhisthir Samvad In Hindi | यक्ष युधिष्ठिर संवाद - महाभारत

दोस्तों इस वीडियो में हम युधिष्ठिर और यक्ष के बीच हुए कुछ रोचक प्रश्न और उनके उत्तर देखेंगे

युधिष्ठिर और यक्ष के बीच हुए संवाद आध्यात्मदर्शन और धर्म से जुड़े हुए हे जो मनुष्य को जीवन के सत्य बताते हे तो आइये देखते हे यक्ष ने कौन कौन से सवाल किये और युधिष्ठिर ने क्या क्या जवाब दिया

दोस्तों महाभारत की कथा अनुसार, जलाशय में पानी पीने गए नकुल, सहदेव, अर्जुन तथा भीम यक्ष के प्रश्नों की परवाह न करते हुए पानी पीने गए, और मूर्छित हो गए, काफी देर तक अपने भाइयों को न आता देख युधिष्ठिर व्याकुल हो उठे और खोजते हुए, उसी विषैले जलाशय के किनारे पहुचें, जिसका जल पीकर चारो भाई मूर्छित पड़े थे।

उस समय यक्ष और युधिष्ठिर के बीच हुए कुछ रोचक प्रश्न और उनके उत्तर इस वीडियो में देखेंगे जिसे हमे भी अपने जीवन में कुछ प्रेरणा मिलेगी

१ यक्ष ने प्रश्न किया : जीवन का उद्देश्य क्या है?

युधिष्ठिर ने उत्तर दिया : जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है, जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है।

२ यक्ष प्रश्न: जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है?

युधिष्ठिर उत्तर: जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है।

३. यक्ष प्रश्न: संसार में दुःख क्यों है?

युधिष्ठिर उत्तर: संसार के दुःख का कारण लालच, स्वार्थ और भय हैं।

४ यक्ष प्रश्न: तो फिर ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की?

युधिष्ठिर उत्तर: ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की।

५ यक्ष प्रश्न: क्या ईश्वर है? कौन है वह? क्या वह स्त्री है या पुरुष?

युधिष्ठिर उत्तर: कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो इसलिए वह भी है उस महान कारण को ही आध्यात्म में ईश्वर कहा गया है। वह न स्त्री है न पुरुष।

६ यक्ष प्रश्न: ईश्वर का स्वरूप क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: वह सचिदानंद है, वह निराकार है वह सभी रूपों में अपने आप को स्वयं को व्यक्त करता है।

७ यक्ष प्रश्न: यदि ईश्वर ने संसार की रचना की तो फिर ईश्वर की रचना किसने की?

युधिष्ठिर उत्तर: वह अजन्मा अमृत और अकारण है।

८ यक्ष प्रश्न: भाग्य क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है। आज का प्रयत्न कल का भाग्य है।

९ यक्ष प्रश्न: सुख और शान्ति का रहस्य क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: सत्य, सदाचार, प्रेम और क्षमा सुख का कारण हैं। असत्य, अनाचार, घृणा और क्रोध का त्याग शान्ति का मार्ग है।

१० यक्ष प्रश्न: सच्चा प्रेम क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: स्वयं को सभी में देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सर्वव्याप्त देखना सच्चा प्रेम है। स्वयं को सभी के साथ एक देखना सच्चा प्रेम है।

११ यक्ष प्रश्न: बुद्धिमान कौन है?

युधिष्ठिर उत्तर: जिसके पास विवेक है।

१२ यक्ष प्रश्न: चोर कौन है?

युधिष्ठिर उत्तर: इन्द्रियों के आकर्षण, जो इन्द्रियों को हर लेते हैं चोर हैं।

१३ यक्ष प्रश्न: जागते हुए भी कौन सोया हुआ है?

युधिष्ठिर उत्तर: जो आत्मा को नहीं जानता वह जागते हुए भी सोया है।

१४ यक्ष प्रश्न: दुर्भाग्य का कारण क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: मद और अहंकार।

१५ यक्ष प्रश्न: सौभाग्य का कारण क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: सत्संग और सबके प्रति मैत्री भाव।

१७ यक्ष प्रश्न: मृत्यु पर्यंत यातना कौन देता है?

युधिष्ठिर उत्तर: गुप्त रूप से किया गया अपराध।

१८ यक्ष प्रश्न: संसार को कौन जीतता है?

युधिष्ठिर उत्तर: जिसमें सत्य और श्रद्धा है।

१९ यक्ष प्रश्न: अज्ञान क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: आत्मज्ञान का अभाव अज्ञान है।

२० यक्ष प्रश्न: वह क्या है जो अस्तित्व में है और नहीं भी?

युधिष्ठिर उत्तर: माया।

२१ यक्ष प्रश्न: माया क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: नाम और रूपधारी नाशवान जगत।

२२ यक्ष प्रश्नः मनुष्य का साथ कौन देता है?

युधिष्ठिर उत्तरः धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है।

२३ यक्ष प्रश्न: धैर्य क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर : अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना ही धैर्य है।

२४ यक्ष प्रश्न: दान का वास्तविक अर्थ क्या है?

युधिष्ठिर उत्तर: प्राणीमात्र की रक्षा का भाव ही वास्तव में दान है।

२५ यक्ष प्रश्नः भूमि से भारी चीज क्या है?

युधिष्ठिर उत्तरः संतान को कोख़ में धरने वाली मां, भूमि से भी भारी होती है।

२६ यक्ष प्रश्नः आकाश से भी ऊंचा कौन है?

युधिष्ठिर उत्तरः पिता।

२७ यक्ष प्रश्नः हवा से भी तेज चलने वाला कौन है?

युधिष्ठिर उत्तरः मन।

२८ यक्ष प्रश्नः घास से भी तुच्छ चीज क्या है?

युधिष्ठिर उत्तरः चिंता।

२९ यक्ष प्रश्न : संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है?

युधिष्ठिर उत्तरः हर रोज आंखों के सामने कितने ही प्राणियों की मृत्यु हो जाती है यह देखते हुए भी इंसान अमरता के सपने देखता है। यही महान आश्चर्य है।

युधिष्ठिर के वचन सुनकर यक्ष ने प्रसन्न होते हुए कहा- “हे वत्स! मैं तुम्हारे विचारों से अत्यन्त ही प्रसन्न हुआ हूँ, इसलिये मैं तुम्हारे सभी भाइयों को जीवित करता हूँ। वास्तव में मैं तुम्हारा पिता धर्म हूँ और तुम्हारी परीक्षा लेने के लिये यहाँ आया था।” 



धर्म के इतना कहते ही सब पाण्डव ऐसे उठ खड़े हुए जैसे कि गहरी नींद से जागे हों। युधिष्ठिर ने अपने पिता धर्म के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया।

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