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Saturday, June 16, 2018

रामायण के पात्र | Ramayana characters

रामायण के पात्र 

  • दशरथ: कौशल प्रदेश के राजा। राजधानी एवं निवास अयोध्या।
  • कौशल्या- दशरथ की बड़ी रानी, राम की माता।
  • सुमित्रा - दशरथ की मझली रानी, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न की माता।
  • कैकयी- दशरथ की छोटी रानी, भरत की माता।
  • सीता- जनकपुत्री, राम की पत्नी।
  • उर्मिला- जनकपुत्री, लक्ष्मण की पत्नी।
  • मांडवी- जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री, भरत की पत्नी।
  • श्रुतकीर्ति - जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री, शत्रुघ्न की पत्नी।
  • राम- दशरथ तथा कौशल्या के पुत्र, सीता के पति।
  • लक्ष्मण - दशरथ तथा सुमित्रा के पुत्र, उर्मिला के पति।
  • भरत – दशरथ तथा कैकयी के पुत्र, मांडवी के पति।
  • शत्रुघ्न - दशरथ तथा सुमित्रा के पुत्र, श्रुतकीर्ति के पति, मथुरा के राजा लवणासुर के संहारक।
  • शान्ता – दशरथ की पुत्री, राम बहन।
  • बाली – किश्कंधा (पंपापुर) का राजा, रावण का मित्र तथा साढ़ू, साठ हजार हाथीयों का बल।
  • सुग्रीव – बाली का छोटा भाई, जिनकी हनुमान जी ने मित्रता करवाई।
  • तारा – बाली की पत्नी, अंगद की माता, पंचकन्याओं में स्थान।
  • रुमा – सुग्रीव की पत्नी, सुषेण वैध की बेटी।
  • अंगद – बाली तथा तारा का पुत्र।
  • रावण – ऋषि पुलस्त्य का पौत्र, विश्रवा तथा पुष्पोत्कटा (केकसी) का पुत्र।
  • कुंभकर्ण – रावण तथा कुंभिनसी का भाई, विश्रवा तथा पुष्पोत्कटा (केकसी) का पुत्र।
  • कुंभिनसी – रावण तथा कूंभकर्ण की बहन, विश्रवा तथा पुष्पोत्कटा (केकसी) की पुत्री।
  • विश्रवा - ऋषि पुलस्त्य का पुत्र, पुष्पोत्कटा-राका-मालिनी के पति।
  • विभीषण – विश्रवा तथा राका का पुत्र, राम का भक्त।
  • पुष्पोत्कटा (केकसी) – विश्रवा की पत्नी, रावण, कुंभकर्ण तथा कुंभिनसी की माता।
  • राका – विश्रवा की पत्नी, विभीषण की माता।
  • मालिनी - विश्रवा की तीसरी पत्नी, खर-दूषण त्रिसरा तथा शूर्पणखा की माता।
  • त्रिसरा – विश्रवा तथा मालिनी का पुत्र, खर-दूषण का भाई एवं सेनापति।
  • शूर्पणखा - विश्रवा तथा मालिनी की पुत्री, खर-दूसन एवं त्रिसरा की बहन, विंध्य क्षेत्र में निवास।
  • मंदोदरी – रावण की पत्नी, तारा की बहन, पंचकन्याओ मे स्थान।
  • मेघनाद – रावण का पुत्र इंद्रजीत, लक्ष्मण द्वारा वध।
  • दधिमुख – सुग्रीव के मामा।
  • ताड़का – राक्षसी, मिथिला के वनों में निवास, राम द्वारा वध।
  • मारीची – ताड़का का पुत्र, राम द्वारा वध (स्वर्ण मर्ग के रूप मे )।
  • सुबाहू – मारीची का साथी राक्षस, राम द्वारा वध।
  • सुरसा – सर्पों की माता।
  • त्रिजटा – अशोक वाटिका निवासिनी राक्षसी, रामभक्त, सीता से अनुराग।
  • प्रहस्त – रावण का सेनापति, राम-रावण युद्ध में मृत्यु।
  • विराध – दंडक वन मे निवास, राम लक्ष्मण द्वारा मिलकर वध।
  • शंभासुर – राक्षस, इन्द्र द्वारा वध, इसी से युद्ध करते समय कैकेई ने दशरथ को बचाया था तथा दशरथ ने वरदान देने को कहा।
  • सिंहिका – लंका के निकट रहने वाली राक्षसी, छाया को पकड़कर खाती थी।
  • कबंद – दण्डक वन का दैत्य, इन्द्र के प्रहार से इसका सर धड़ में घुस गया, बाहें बहुत लम्बी थी, राम-लक्ष्मण को पकड़ा, राम- लक्ष्मण ने गङ्ढा खोद कर उसमें गाड़ दिया।
  • जामबंत – रीछ थे, रीछ सेना के सेनापति।
  • नल – सुग्रीव की सेना का वानरवीर।
  • नील – सुग्रीव का सेनापति जिसके स्पर्श से पत्थर पानी पर तैरते थे, सेतुबंध की रचना की थी।
  • नल और नील – सुग्रीव सेना में इंजीनियर व राम सेतु निर्माण मे महान योगदान। (विश्व के प्रथम इंटरनेशनल हाईवे “रामसेतु” के आर्किटेक्ट इंजीनियर)
  • शबरी – अस्पृश्य जाती की रामभक्त, मतंग ऋषि के आश्रम में राम-लक्ष्मण-सीता का आतिथ्य सत्कार।
  • संपाती – जटायु का बड़ा भाई, वानरों को सीता का पता बताया।
  • जटायु – रामभक्त पक्षी, रावण द्वारा वध, राम द्वारा अंतिम संस्कार।
  • गृह – श्रंगवेरपुर के निषादों का राजा, राम का स्वागत किया था।
  • हनुमान – पवन के पुत्र, राम भक्त, सुग्रीव के मित्र।
  • सुषेण वैध – सुग्रीव के ससुर।
  • केवट – नाविक, राम-लक्ष्मण-सीता को गंगा पार करायी।
  • शुक्र-सारण – रावण के मंत्री जो बंदर बनकर राम की सेना का भेद जानने गये।
  • अगस्त्य – पहले आर्य ऋषि जिन्होंने विन्ध्याचल पर्वत पार किया था तथा दक्षिण भारत गये।
  • गौतम – तपस्वी ऋषि, अहल्या के पति, आश्रम मिथिला के निकट।
  • अहल्या - गौतम ऋषि की पत्नी, इन्द्र द्वारा छलित तथा पति द्वारा शापित, राम ने शाप मुक्त किया, पंचकन्याओं में स्थान।
  • ऋण्यश्रंग – ऋषि जिन्होंने दशरथ से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कटाया था।
  • सुतीक्ष्ण – अगस्त्य ऋषि के शिष्य, एक ऋषि।
  • मतंग – ऋषि, पंपासुर के निकट आश्रम, यही शबरी भी रहती थी।
  • वसिष्ठ – अयोध्या के सूर्यवंशी राजाओं के गुरु।
  • विश्वमित्र – राजा गाधि के पुत्र, राम-लक्ष्मण को धनुर्विधा सिखायी थी।
  • शरभंग – एक ऋषि, चित्रकूट के पास आश्रम।
  • सिद्धाश्रम – विश्वमित्र के आश्रम का नाम।
  • भरद्वाज – बाल्मीकी के शिष्य, तमसा नदी पर क्रौच पक्षी के वध के समय वाल्मीकि के साथ थे, माँ-निषाद’ वाला श्लोक कंठाग्र कर तुरंत वाल्मीकि को सुनाया था।
  • सतानन्द – राम के स्वागत को जनक के साथ जाने वाले ऋषि।
  • युधाजित – भरत के मामा।
  • जनक – मिथिला के राजा।
  • सुमन्त्र – दशरथ के आठ मंत्रियों में से प्रधान।
  • मंथरा – कैकयी की मुंह लगी दासी, कुबड़ी।
  • देवराज – जनक के पूर्वज-जिनके पास परशुराम ने शंकर का धनुष सुनाभ (पिनाक) रख दिया था।
  • अयोध्या – राजा दशरथ के कोशल प्रदेश की राजधानी, बारह योजना लंबी तथा तीन योजन चौड़ी, नगर के चारों ओर ऊँची व चौड़ी दीवारें व खाई थीं। राजमहल से आठ सड़के बराबर दूरी पर परकोटे तक जाती थी।





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