Update

Thursday, February 22, 2018

होलिका दहन | Holi | Holika Dahan Story

भारत त्योहारों का देश है और होली एक ऐसा पर्व है जिसे बेहद ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस बार 2 मार्च 2018 को होली का त्योहार मनाया जाएगा और 1 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन के दिन पवित्र अग्नि जलाई जाती है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत है. होली वसंत ऋतु के आने और सर्दियों के जाने का प्रतीक है. यह शुभ दिन फाल्गुन महीने में पूर्णिमा से पहले पड़ता है
Holika Dahan Story
होलाष्टक का संबंध भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद व उनके पिता अत्याचारी हिरण्यकश्यप की कथा से है. स्कंद पुराण के अनुसार राक्षसी प्रवृत्ति के राजा हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से ईर्ष्या व जलन की भावना रखता था. उसके राज्य में जो कोई भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करता था उसे मौत की सजा सुनाई जाती थी. राजा के फरमान से डरकर उसके राज्य में कोई भी भगवान विष्णु की पूजा नहीं करता था.

कथा प्रसंग के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था. अपने पुत्र प्रहलाद की विष्णु भक्ति के बारे में जब राजा को पता चला तो उसने प्रहलाद को समझाया मगर प्रहलाद ने भगवान विष्णु की भक्ति करनी नहीं छोड़ी. इससे क्रोधित होकर राजा ने अपने पुत्र को मृत्युदंड की सजा सुनाई.

राजा के आदेश पर सैनिकों ने भक्त प्रहलाद को अनेक यातनाएं दीं. उसे मरने के लिए जंगली जानवरों के बीच छोड़ा, नदी में डुबो दिया, ऊंचे पर्वत से भी फेंका गया. हर सजा पर प्रहलाद भगवान की कृपा से बच गया. अंत में राजा ने अपनी बहन होलिका की गोद में बिठाकर प्रहलाद को जिंदा जला डालने का हुक्म दिया.

राजा की बहन होलिका को वरदान था कि वह अग्नि में भी भस्म नहीं होगी. प्रभु कृपा से प्रहलाद तो बच गया मगर होलिका जल गई. उस दिन से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई.

प्रहलाद की जान बच गई और उसकी जगह होलिका उस आग में जल गई. यही कारण है होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.

एक कथा यह भी है कि भगवान शिव की तपस्या को भंग करने के कारण शिव ने कामदेव को फाल्गुन की अष्टमी में भस्म कर दिया था। कामदेव की पत्नी रति ने उस समय क्षमा याचना की और शिव जी ने कामदेव को पुनः जीवित करने का आश्वासन दिया। इसी खुशी में लोग रंग खेलते हैं।

No comments:

Post a Comment