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Monday, February 26, 2018

श्री हनुमानजीकी आरती | Hanuman Aarti | Aarti Kije Hanuman

Hanuman Aarti

आरती कीजै हनुमानलला की ।
दुष्टदलन रघुनाथ कला की ।।

जाके बलसे गिरिवर कांपै ।
रोग-दोष जाके निकट न झांपे ।।

अंजनिपुत्र महा बलदाई ।
संतनके प्रभु सदा सहाई।।आरती।।

दे बीरा रघुनाथ पठाये ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ।।

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई ।।
जात पवनसुत बार न लाई ।।आरती।।

लंका जारि असुर संहारे ।
सियारामजीके काज संवारे ।।

लक्ष्मण मूर्छित पडे सकारे ।
आनि संजीवनी प्राण उबारे।।आरती।।

पैठि पताल तोरे जम-कारे।
अहिरावणकी भुजा उखारे ।।

बांए भुजा असुरदल मारे ।
दाहिनी भुजा संतजन तारे ।।आरती।।

सुर नर मुनि जन आरति उतारे ।
जै जै जै हनुमान उचारे ।।

कंचनथाल कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ।।आरती।।

जो हनुमानजीकी आरति गावै ।
बसि बैकुंठ परम पद पावै।।

लंका विध्वंस किये रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीरति गाई।।

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।

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