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Friday, December 8, 2017

प्रार्थना | Prayer | School Prarthana in hindi | वंदना

प्रार्थना निवेदन करके उर्जा प्राप्त करने की शक्ति है और परमेश्वर से सीधा संवाद है। प्रार्थना लौकिक व अलौकिक समस्या का समाधान है। प्रार्थना व्यक्तिगत हो सकती है और सामूहिक भी। प्राथना  में शब्दों (मंत्र, गीत आदि) का प्रयोग हो सकता है या प्रार्थना मौन भी हो सकती है।

प्रार्थना एक धार्मिक क्रिया है जो ब्रह्माण्ड के किसी 'महान शक्ति' से सम्बन्ध जोड़ने की कोशिश करती है।


Prarthana in hindi
प्रात: कर-दर्शनम्
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

पृथ्वी क्षमा प्रार्थना
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडिते।
विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे॥

स्नान मन्त्र
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु॥

सूर्यनमस्कार
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥
ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च।।
ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:

दीप दर्शन
शुभं करोतु कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥

दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

गणपति स्तोत्र
वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय।
लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय।
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।

पुष्प-माला अर्पित
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो |
मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः ||

स्वस्ति-वाचन
ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

आदिशक्ति वंदना
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

शिव स्तुति
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्रहारं।
सदा वसंतं हृदयारविन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि॥

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नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे. महादेवाय धीमहि. तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्.

विष्णु स्तुति
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

ॐ नमो नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् ।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥



त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

सरस्वती वंदना
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्याऽपहा॥

श्री कृष्ण स्तुति
कस्तूरी तिलकं ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले, वेणु करे कंकणम्॥
सर्वांगे हरिचन्दनं सुललितं, कंठे च मुक्तावलि।
गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते, गोपाल चूडामणी॥

मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥

हनुमान  वंदना
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्।
दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥

महामृत्युंजय मंत्र 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मुक्ति मंत्र
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

गायत्री मन्त्रः
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

खाना खाते समय 
यज्ञ शिष्ठा शिनः षन्तो मुच्यन्ते सर्व किल बिशैहि |
भुन्जते ते त्वघं पाप ये पचन्त्यात्मा कारणात ||

यत् करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् |
यत् तपस्यसि कौन्तेय, तत्कुरुश्व मदर्पणम् ||

अहं वैश्वा नरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः |
प्राणापान समायुक्त, पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ||

ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु सहवीर्यं करवावहै |
तेजस्विना वधितमस्तु मा विद्विषावहै  ||
ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः 


शांति पाठ
ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

ॐ असतो मा सद्गमय । 
तमसो मा ज्योतिर्गमय । 
मृत्योर्मा अमृतं गमय । 
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ 

सायः प्रार्थना
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने l
प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः ll
कर चरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्‌ ll
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व
जय जय करणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव । 
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । 
त्वमेव विद्या द्रविणम् त्वमेव । 
त्वमेव सर्वम् मम देव देव ॥

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया |  
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।
॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

अपने बच्चों  को श्लोकों को नित्य दैनन्दिनी में शामिल करने हेतु संस्कार दें एवं खुद भी पढें | जब हम वंदना करते हैं तो अपने अहं का दमन करते हैं। प्रार्थना हमें बल देती हैं और हमें पवित्र बनाती हैं।हम परमेश्वर में अपने विश्वास को प्रदर्शित करने के लिए प्रार्थना करते हैं | कई बार ये प्रश्न होता हे की


ईश्वर, भगवान,परमेश्वर, देवी-देवता या प्रकृति के समक्ष प्रार्थना करने से मन और तन को शांति मिलती है। मंदिर, घर या किसी एकांत स्थान पर खड़े होकर या फिर ध्यान मुद्रा में बैठकर दोनों हाथों को नमस्कार मुद्रा में भी प्राथन क्र सकते हे । 

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